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श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर काशीपुर में उमड़ा जनसैलाब, नगर कीर्तन में दिखी एकता और भाईचारा की झलक

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राजू अनेजा,काशीपुर।दसवें पातशाह श्री गुरु गोविंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर काशीपुर में निकाला गया विशाल नगर कीर्तन श्रद्धा, अनुशासन और सांस्कृतिक वैभव का अनुपम उदाहरण बन गया। नगर कीर्तन में उमड़ा जनसैलाब और संगत की आस्था ने पूरे शहर को गुरु भक्ति के रंग में रंग दिया।
नगर कीर्तन की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल अद्भुत और सजीव झांकियां रहीं, जो सिख इतिहास, गुरु परंपरा और बलिदान की गाथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रही थीं। झांकियों को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर नगरवासी बड़ी संख्या में मौजूद रहे और हर झांकी पर श्रद्धा के साथ पुष्प वर्षा की गई।
इस अवसर पर सिख युवकों द्वारा गतका (सिख मार्शल आर्ट) का रोमांचक प्रदर्शन किया गया। शौर्य, कौशल और अनुशासन से भरपूर इस कला प्रदर्शन ने दर्शकों का मन मोह लिया और हर ओर से तालियों की गूंज सुनाई दी। युवाओं के इस प्रदर्शन ने गुरु गोविंद सिंह जी के साहस, वीरता और आत्मरक्षा के संदेश को सजीव कर दिया।
नगर कीर्तन में शामिल विभिन्न प्रकार के बैंड-बाजों ने धार्मिक भजनों और शबद कीर्तन की धुनों से माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। गुरबाणी के सुरों पर झूमती संगत और “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के जयघोषों से पूरा काशीपुर गुंजायमान रहा।
नगर वासियों ने जगह-जगह नगर कीर्तन का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया, वहीं कई स्थानों पर जलपान की सुंदर व्यवस्था भी की गई थी। क्षेत्रीय विधायक त्रिलोक सिंह चीमा और मेयर दीपक बाली ने पुष्प वर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत करते हुए सिख समाज को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भी पुष्प वर्षा कर नगर कीर्तन का अभिनंदन किया गया, जिससे सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश और मजबूत हुआ।
नगर कीर्तन का शुभारंभ शहर के बड़े गुरुद्वारे से हुआ, जो मुख्य बाजार से होते हुए पुनः बड़े गुरुद्वारे में जाकर संपन्न हुआ।
यह नगर कीर्तन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति, शौर्य और भाईचारे का भव्य उत्सव बनकर काशीपुर के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।

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