हिमालय प्रहरी

‘पहाड़’ की बजट से बड़ी आस: पलायन रोकने और बुनियादी ढांचे पर फोकस की मांग

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उत्तराखंड के सीमांत जिलों पिथौरागढ़ और चंपावत के प्रबुद्ध नागरिकों, महिलाओं और युवाओं ने आज (1 फरवरी) पेश होने वाले बजट 2026 से अपनी ‘पहाड़ जैसी’ उम्मीदें साझा की हैं। राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी पलायन और बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

यहाँ स्थानीय निवासियों की प्रमुख अपेक्षाओं का सार दिया गया है:

आम बजट से पहाड़ के लोगों ने केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि ठोस धरातलीय समाधान मांगे हैं।

🚫 1. पलायन: सामाजिक ढांचे का टूटना

  • मुख्य चिंता: गांवों में बुजुर्गों के अंतिम संस्कार के लिए युवाओं का न मिलना पहाड़ की भयावह स्थिति को दर्शाता है।

  • अपेक्षा: रोजगार के अवसर गांव के पास ही पैदा हों ताकि सीमाओं पर सुरक्षा बलों को शव ले जाने की नौबत न आए।

👩 2. महिला सशक्तीकरण और तकनीकी शिक्षा

  • स्थानीय जरूरत: ग्रामीण महिलाओं का बड़ा हिस्सा पशुपालन और खेती से जुड़ा है। इसे वैज्ञानिक तकनीक और स्वरोजगार से जोड़कर लाभकारी बनाने हेतु बजट बढ़ाने की मांग।

  • कौशल विकास: गृहणियों का कहना है कि तकनीकी शिक्षा के लिए बच्चों को शहर भेजना पड़ता है। पहाड़ों में ही स्किल डेवलपमेंट सेंटर खुलने चाहिए।

🏨 3. पर्यटन और उद्यमिता

  • उद्यमियों की मांग: हवाई सेवा और सड़कों के बाद अब पर्यटकों के लिए सुविधाजनक होटल और रेस्टोरेंट जरूरी हैं। इसके लिए उद्यमियों को कम ब्याज पर ऋण (Low-interest loans) मिले।

🏥 4. स्वास्थ्य और शिक्षा की बुनियाद

  • प्राथमिकता: जब तक पहाड़ में अच्छे अस्पताल और तकनीकी शिक्षण संस्थान नहीं होंगे, पलायन नहीं रुकेगा। बजट में इन क्षेत्रों के लिए विशेष आवंटन की मांग।


💼 मध्यम वर्ग और युवाओं की राय (चंपावत क्षेत्र)

वर्ग प्रमुख मांग / अपेक्षा
गृहणी रसोई के सामान और रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई पर लगाम
युवा/छात्र रोजगारोन्मुख बजट, बेरोजगारी दर कम करने के उपाय और सस्ती शिक्षा ऋण।
मध्यम वर्ग आयकर (Income Tax) श्रेणियों को व्यवहारिक बनाकर कर का बोझ कम करना।
व्यापारी समावेशी विकास, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की क्रय शक्ति बढ़े और व्यापार फले-फूले।

📌 प्रमुख बिंदु: क्या चाहती है जनता?

  • जंगली जानवरों से सुरक्षा: खेती को घाटे का सौदा बनने से रोकने के लिए सुरक्षात्मक प्रावधान।

  • डिजिटल कनेक्टिविटी: ‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में पहाड़ के हर गांव को इंटरनेट से जोड़ना।

  • पेयजल: ‘जल जीवन मिशन’ के बजट का सही क्रियान्वयन ताकि गर्मियों में पानी की किल्लत न हो।

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