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बाबा केदार के प्रति पीएम मोदी की अटूट श्रद्धा: साझा कीं भावुक तस्वीरें, बोले- ‘उत्तराखंड की प्रगति विकसित भारत का आधार’

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देहरादून/नई दिल्ली (23 अप्रैल 2026): केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगाध आस्था एक बार फिर प्रकट हुई है। प्रधानमंत्री ने बुधवार को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बाबा केदार की पावन धरा पर बिताए गए अपने पूर्व के क्षणों की भावुक तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने न केवल अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की, बल्कि उत्तराखंड के स्वर्णिम भविष्य का विजन भी देश के सामने रखा।

सात बार कर चुके हैं बाबा केदार के दर्शन

प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड और विशेषकर केदारनाथ धाम से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो वर्ष 2014 में देश की कमान संभालने के बाद प्रधानमंत्री अब तक 28 बार उत्तराखंड का दौरा कर चुके हैं, जिसमें से सात बार उन्होंने विशेष रूप से बाबा केदारनाथ के दर्शन और पूजन किए हैं।

‘उत्तराखंड का दशक’ संकल्प हो रहा साकार

अपने शुभकामना संदेश में प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प की सिद्धि में ‘विकसित उत्तराखंड’ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने पुराने संबोधन को याद दिलाते हुए कहा:

“कुछ वर्ष पूर्व बाबा केदार की धरती से मैंने कहा था कि यह दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज राज्य की चहुंमुखी प्रगति इस विश्वास को सच कर रही है। पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक विकास के क्षेत्रों में उत्तराखंड नए कीर्तिमान रच रहा है।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि उत्तराखंड में चल रहे विकास के ‘महायज्ञ’ ने चारधाम यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बना दिया है। उन्होंने तीर्थयात्रियों से यात्रा के दौरान पांच संकल्पों का पालन करने का भी विशेष अनुरोध किया।

सीएम धामी ने बताया ‘आध्यात्मिक संबंध की अभिव्यक्ति’

प्रधानमंत्री के इस संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इन तस्वीरों का साझा किया जाना उस गहरे आध्यात्मिक संबंध की अभिव्यक्ति है, जो प्रधानमंत्री का इस तपोभूमि से है।

मुख्यमंत्री ने कहा:

  • सांस्कृतिक एकात्मता: प्रधानमंत्री ने चारधाम यात्रा को भारत की सांस्कृतिक एकता का आधार बताया है।

  • भक्ति का उत्साह: बाबा के धाम में ‘हर-हर महादेव’ का उद्घोष प्रधानमंत्री की श्रद्धाभिव्यक्ति के साथ और अधिक भावपूर्ण हो गया है।

  • आत्मिक जागरण: यह संवाद करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा को केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण की यात्रा के रूप में स्थापित करता है।

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