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पहाड़ों पर ‘प्रदूषण का ग्रहण’: नैनीताल में PM 2.5 का स्तर सामान्य से 3 गुना ज्यादा; धुंध की चपेट में वादियाँ

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नैनीताल (13 मार्च 2026): सरोवर नगरी नैनीताल समेत मुक्तेश्वर, रामगढ़ और कौसानी जैसे पर्यटन स्थल इन दिनों एक अजीब और दूषित धुंध की चादर में लिपटे हुए हैं। दोपहर होते ही गहरी धुंध छा रही है, जिससे न केवल दृश्यता (Visibility) कम हुई है, बल्कि सांस लेना भी दूषित हवा के कारण चुनौतीपूर्ण हो गया है।

1. आंकड़ों में प्रदूषण: सामान्य से कहीं अधिक

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के आंकड़ों के अनुसार, नैनीताल में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रही है:

  • सामान्य स्तर: आमतौर पर यहाँ PM 2.5 का स्तर 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के आसपास रहता है।

  • वर्तमान स्थिति: पिछले एक सप्ताह से यह 60 से 85 के बीच झूल रहा है, जो सामान्य से तीन गुना अधिक है।

  • पीक लेवल: 8 मार्च को प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक 85 दर्ज किया गया।

2. प्रदूषण के कारण: क्यों बदली पहाड़ों की फिजा?

एरीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह ने इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं:

  • मैदानी प्रदूषण का स्लोप विंड असर: मैदानी इलाकों की प्रदूषित हवा ढलानों के सहारे ऊपर उठ रही है और पहाड़ों की नमी के साथ मिलकर ‘फॉग’ (धुंध) बना रही है।

  • वायुमंडलीय स्थिरता: हवा की गति मंद होने के कारण प्रदूषक तत्व ऊपर उठने के बजाय सतह पर ही जम गए हैं।

  • तापमान में उछाल: इस प्रदूषण के कारण पहाड़ों के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है।

3. जनजीवन और प्रकृति पर प्रभाव

  • नैसर्गिक सुंदरता पर असर: वसंत के खिले हुए फूलों और नई पत्तियों पर धुंध की वजह से दृश्यता कम हो गई है। पर्यटक और स्थानीय लोग इस ‘ग्रे’ (धुंधले) वातावरण को देखकर चिंतित हैं।

  • स्वास्थ्य का खतरा: PM 2.5 का इतना उच्च स्तर फेफड़ों और आंखों के लिए हानिकारक है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।


ARIES: पिछले 7 दिनों का PM 2.5 रिकॉर्ड

तिथि PM 2.5 स्तर (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
07 मार्च 65
08 मार्च 85 (उच्चतम)
09 मार्च 80
10 मार्च 77
11 मार्च 58
12 मार्च 60

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