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उत्तराखंड को सबसे अनुकूल पर्वतीय राज्य बनाने की तैयारी: नई ईवी नीति अंतिम चरण में; रोड टैक्स व रजिस्ट्रेशन फीस में 100% छूट, चार्जिंग स्टेशनों पर भारी सब्सिडी

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देहरादून: उत्तराखंड को देश का सबसे अधिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) अनुकूल पर्वतीय राज्य बनाने के उद्देश्य से धामी सरकार की नई ईवी नीति-2026 बनाने की विधिक प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। उद्योग विभाग द्वारा तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी नीति का वित्त विभाग द्वारा परीक्षण किया जा चुका है और वर्तमान में परिवहन विभाग से इसके नीतिगत प्रविधानों पर अंतिम मत मांगा गया है। परिवहन विभाग की विधिक संस्तुति मिलते ही इसे आगामी कैबिनेट बैठक के समक्ष अंतिम स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। इस प्रस्तावित नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को सुलभ बनाने के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में शत-प्रतिशत (100%) छूट देने समेत महिलाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का बड़ा प्रविधान किया गया है।

₹7,000 करोड़ का निवेश और 12 हजार रोजगार सृजित करने का बड़ा लक्ष्य

शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस नई प्रस्तावित नीति के माध्यम से राज्य सरकार का विधिक फोकस केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश आकर्षित करना भी है।

  • बड़ा वित्तीय निवेश: इस नीति के जरिए उत्तराखंड में ईवी विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और उससे जुड़े सहायक उद्योगों में ₹5,000 करोड़ से लेकर ₹7,000 करोड़ तक का भारी पूंजी निवेश आकर्षित करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

  • रोजगार के अवसर: उद्योगों की स्थापना से राज्य के युवाओं के लिए 6,000 से लेकर 12,000 तक नए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के विधिक अवसर सृजित होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

  • इन क्षेत्रों पर विशेष फोकस: इसके तहत दोपहिया वाहनों, सार्वजनिक परिवहन (बसों), व्यावसायिक चारपहिया वाहनों और लास्ट माइल लॉजिस्टिक्स (माल ढुलाई) क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को अनिवार्य व व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

पहाड़ों में चार्जिंग स्टेशनों पर 90% और मैदानों में 80% तक मिलेगी सरकारी सहायता

राज्यभर में इलेक्ट्रिक वाहनों के सुचारू संचालन के लिए एक सुरक्षित, सुलभ और किफायती चार्जिंग नेटवर्क का ढांचा तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए सरकार आकर्षक वित्तीय सब्सिडी देने जा रही है:

  • स्थायी पूंजी निवेश पर प्रोत्साहन: राज्य के मैदानी क्षेत्रों में कमर्शियल चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने पर कुल स्थायी पूंजी निवेश का 80 प्रतिशत तथा विषम पर्वतीय क्षेत्रों में ढांचा खड़ा करने पर 90 प्रतिशत तक का भारी प्रोत्साहन (सब्सिडी) देने का विधिक प्रस्ताव है।

  • प्लग क्षमता के अनुसार सहायता: 14 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 200 चार्जिंग प्लग स्थापित करने पर अधिकतम ₹10 लाख रुपये तथा 120 किलोवाट से अधिक क्षमता वाले पहले 20 हाई-स्पीड प्लग लगाने पर ₹25 लाख रुपये तक की विधिक वित्तीय सहायता दी जा सकती है।

  • प्रत्येक 50 किमी पर चार्जिंग स्टेशन: राज्य के प्रमुख राज्य राजमार्गों (SH) और राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर यात्रियों की सुविधा के लिए प्रत्येक 50 किलोमीटर की दूरी पर आधुनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की विस्तृत कार्ययोजना है।

परिवहन विभाग से मांगा गया मत, जल्द कैबिनेट में पेश होगी नीति

इस नीतिगत फेरबदल और प्रविधानों की विधिक प्रगति की पुष्टि करते हुए राज्य के अपर परिवहन आयुक्त एस.के. सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार नीति के विभिन्न ड्राफ्ट्स पर परिवहन विभाग से आधिकारिक मत देने को कहा गया है। वर्तमान में विभाग के तकनीकी और विधिक विंग द्वारा इस पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। विभाग का मत शामिल होते ही यह ड्राफ्ट अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के पटल पर रख दिया जाएगा, जिसके बाद प्रदेश में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के एक नए युग की शुरुआत होगी।

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