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उत्तराखंड में चुनावी रणभेरी: भाजपाई दिग्गजों की हुंकार के बाद कांग्रेस का पलटवार, जल्द उत्तराखंड आएंगे राहुल गांधी

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देहरादून: उत्तराखंड में आगामी वर्ष (2027) में होने वाले विधानसभा चुनावों की सियासी तपिश अब साफ महसूस होने लगी है। सत्ताधारी दल भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों को चुनावी मैदान में उतारकर माहौल गरमाने के बाद, अब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी पलटवार की तैयारी में जुट गई है। इसी सिलसिले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित हुआ है, जिससे राज्य का सियासी पारा और चढ़ना तय माना जा रहा है।

गढ़वाल और अल्मोड़ा से फूंकेंगे चुनावी शंखनाद

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी का यह दौरा इसी माह के अंत में या अगले महीने के प्रथम सप्ताह में हो सकता है। पार्टी उनके इस दौरे के माध्यम से राज्य में अपने चुनाव अभियान का औपचारिक शंखनाद करेगी। इसके लिए गढ़वाल और अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्रों को चुना गया है, जहां राहुल गांधी की बड़ी जनसभाएं कराने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

बैकफुट पर चल रही कांग्रेस को ‘रागा’ से उम्मीद

फिलहाल उत्तराखंड की चुनावी पिच पर भाजपा फ्रंट फुट पर खेलती नजर आ रही है। केंद्रीय नेताओं के ताबड़तोड़ दौरों और बड़ी घोषणाओं के बाद बैकफुट पर दिख रही कांग्रेस को पूरी उम्मीद है कि राहुल गांधी की एंट्री से राज्य का सियासी खेल बदल सकता है। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत समेत तमाम वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के दौरे को सफल बनाने के लिए लगातार मंथन कर रहे हैं।

गुटबाजी और टीम गठन का ‘यक्ष प्रश्न’ बरकरार

राजनीतिक विश्लेषक राहुल गांधी के इस दौरे को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के जवाब में कांग्रेस की बड़ी चाल मान रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के भीतर की राहें इतनी आसान नहीं हैं। पार्टी में धड़ेबाजी, अंदरूनी खींचतान और अविश्वास के बादल अभी पूरी तरह छंटे नहीं हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या राहुल गांधी का यह दौरा प्रदेश कांग्रेस को आपसी कलह से बाहर निकालकर संगठन में नई ऊर्जा भर पाएगा?

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि प्रदेश अध्यक्ष पिछले सात महीनों से अपनी नई टीम (प्रदेश कार्यकारिणी) के गठन का इंतजार कर रहे हैं, क्या राहुल गांधी के इस दौरे के बाद हाईकमान इस गुत्थी को सुलझा पाएगा? बहरहाल, कांग्रेस के साथ-साथ सत्ताधारी दल भाजपा की नजरें भी राहुल गांधी के इस प्रस्तावित दौरे और उसके बाद कांग्रेस के भीतर होने वाले बदलावों पर टिकी हुई हैं।

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