
रामनगर (नैनीताल), 20 जून 2026: उत्तराखंड में मानसून सीजन के आगमन और विधिक समय-सीमा पूरी होने के चलते सात महीनों से संचालित हो रहा कोसी और दाबका नदी का खनन कार्य पूरी तरह बंद हो गया है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अधीन आने वाली इन नदियों से इस वित्तीय वर्ष में उपखनिज (आरबीएम) की निकासी से धामी सरकार के राजस्व में ऐतिहासिक उछाल आया है। इस वर्ष सरकार को कुल ₹9,79,19,791 (नौ करोड़ उनासी लाख उन्नीस हजार सात सौ इक्यानवे रुपये) का बंपर राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ४६ प्रतिशत अधिक है।
इस वर्ष 19 जून तक चला खनन; पिछले साल के मुकाबले ₹5 करोड़ से अधिक का मुनाफा
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अंतर्गत कोसी नदी के पांच मुख्य गेटों (कालूसिद्ध, बंजारी प्रथम, बंजारी द्वितीय, खड़ंजा, कठियापुल) और दाबका नदी के छोई गेट से वन विकास निगम द्वारा उपखनिज निकासी का कार्य कराया जाता है।
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अवधि का विस्तार: सामान्यतः खनन सत्र ३१ मई को समाप्त हो जाता है, लेकिन इस वर्ष शासन की अनुमति से इसे १९ जून तक विस्तारित किया गया था।
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राजस्व की तुलना: वन प्रभाग द्वारा जारी आधिकारिक विधिक व वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष २०२४-२५ में कोसी व दाबका नदी से केवल ₹४,५४,५४,८५८ की आय हुई थी। इसके मुकाबले वर्तमान सत्र में कुल ₹९,७९,१干,७९१ का राजस्व मिला है, जो सीधे तौर पर ५ करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त बढ़ोतरी दर्शाता है।
कुल 10.87 लाख घनमीटर उपखनिज की हुई विधिक निकासी
अक्टूबर माह से शुरू हुए इस खनन सत्र के दौरान कुल १०,८७,९९७ घनमीटर उपखनिज की निकासी दर्ज की गई। नदीवार निकासी का विवरण इस प्रकार है:
| नदी का नाम | उपखनिज निकासी (घनमीटर में) |
| कोसी नदी (05 गेट) | ९,५९,६२६ घनमीटर |
| दाबका नदी (छोई गेट) | १,२८,३७१ घनमीटर |
| कुल निकासी | १०,८७,९९७ घनमीटर |
अवैध खनन पर कड़ा प्रहार और नियमित गश्त रही सफलता की मुख्य वजह
राजस्व में हुई इस रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि के पीछे वन विभाग की कड़ाई और प्रभावी विधिक रणनीति मुख्य वजह रही है। मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर के डीएफओ (DFO) प्रकाश चंद्र आर्या ने बताया:
“इस वर्ष राजस्व हानि को न्यूनतम करने और लक्ष्य से बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए विभाग द्वारा निरंतर आक्रामक अभियान चलाया गया। अवैध खनन, अवैध परिवहन और निर्धारित विधिक क्षेत्र से बाहर जाकर खनन करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की गई। रात के समय औचक गश्त, आकस्मिक निरीक्षण, निकासी गेटों पर अभिलेखों का गहन सत्यापन और नियमित विधिक मॉनिटरिंग के कारण ही इस वर्ष सरकार को ₹५ करोड़ से अधिक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है।”
मानसून के कारण नदियों में जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए अब सभी गेटों को विधिक रूप से सील कर दिया गया है। आगामी सत्र के लिए अब नदियों में दोबारा सर्वे के बाद ही आगामी विधिक निविदा व निकासी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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