
किच्छा के चुनावी रण में राजेश प्रताप की बड़ी जीत; मतदान के दौरान हुए विवाद से लेकर अदालत तक पहुंची थी सियासी लड़ाई
राजू अनेजा, किच्छा।
किच्छा नगर पालिका चुनाव का परिणाम सामने आते ही चुनाव के दौरान हुए विवाद की चर्चा फिर तेज हो गई है। मतदान के दौरान विधायक तिलकराज बेहड़ को थप्पड़ मारे जाने की घटना ने पूरे चुनावी माहौल को गरमा दिया था। इसके बाद शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर मतदान से निकलकर मतगणना और फिर अदालत तक पहुंच गया।
मतपेटी में बंद था जवाब, आज सामने आया जनादेश
चुनाव के दौरान हुए विवाद के बाद किच्छा की सियासत में यह सवाल लगातार तैरता रहा कि आखिर जनता अपने मत के जरिए क्या संदेश देगी। अब कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह की जीत के बाद कांग्रेस समर्थक इसे विधायक तिलकराज बेहड़ के पक्ष में आए जनादेश के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक तौर पर कांग्रेस खेमे का संदेश साफ है—विवाद का जवाब सड़क पर नहीं, वोट की ताकत से दिया गया।
हालांकि, किसी एक घटना को परिणाम का एकमात्र कारण मानना मतदाताओं के मतदान के कारणों पर उपलब्ध आंकड़ों के बिना निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। लेकिन इतना जरूर है कि थप्पड़ कांड ने इस चुनाव को सामान्य निकाय चुनाव से कहीं ज्यादा चर्चित बना दिया था।
मतदान के बाद भी खत्म नहीं हुआ संग्राम
मतदान संपन्न होने के बाद भी विवाद थमा नहीं। मतगणना को लेकर दोनों पक्षों की ओर से आशंकाएं और आरोप सामने आए। मामला न्यायालय तक पहुंचा और मतगणना को लेकर लंबा इंतजार करना पड़ा।
इस दौरान किच्छा की चुनावी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रही, बल्कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई।
अब नतीजे ने बदल दिए सियासी समीकरण
राजेश प्रताप सिंह की जीत ने किच्छा की राजनीति में नया अध्याय खोल दिया है। कांग्रेस इसे बेहड़ के राजनीतिक प्रभाव और जनता के समर्थन से जोड़कर देख रही है, जबकि भाजपा के सामने इस परिणाम की राजनीतिक वजहों का विश्लेषण करने की चुनौती है।
जिस चुनाव की शुरुआत मतदान के दौरान हुए विवाद से हुई थी, उसका फैसला आखिरकार वोट की गिनती से हुआ—और किच्छा की नगर पालिका की कुर्सी कांग्रेस के खाते में चली गई।
अब बड़ा सवाल—क्या यह जनादेश 2027 की किच्छा विधानसभा की सियासत का भी संकेत है?
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