रामनगर से पर्यावरण और नियमों की अनदेखी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) के संवेदनशील क्षेत्र के पास स्थित बैड़ाधाल में हरे-भरे फलों के बगीचे को जिस तरह उजाड़ा गया है, उसने प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यहाँ इस अवैध कटान और प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा विवरण दिया गया है:
रामनगर (16 अप्रैल 2026): रामनगर के मानिला विहार से सटे ग्राम सभा बैड़ाधाल में एक फलदार बगीचे को भूमाफियाओं द्वारा निशाना बनाया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पेड़ों पर फल आने ही वाले थे, लेकिन व्यावसायिक लाभ के लिए उन्हें काट दिया गया।
1. घटना का विवरण
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प्रभावित क्षेत्र: ग्राम सभा बैड़ाधाल में लगभग 12 बीघा में फैला बगीचा।
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पेड़ों की स्थिति: आम और लीची के पेड़ों पर बौर (फूल) आ चुके थे और फल लगने की तैयारी थी।
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नुकसान: तहसीलदार की शुरुआती जांच में 50 से अधिक बड़े पेड़ों के काटे जाने की पुष्टि हुई है।
2. प्रशासन की कार्रवाई
मामला तूल पकड़ते ही तहसीलदार और उद्यान विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है:
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तहसीलदार मनीषा मारखाना: उन्होंने पुष्टि की है कि मामला गंभीर है और चूंकि यह क्षेत्र तराई पश्चिमी वन प्रभाग व कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आता है, इसलिए दोनों विभागों को तत्काल कार्रवाई हेतु पत्र भेजा गया है।
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उद्यान विभाग: उद्यान अधिकारी अर्जुन सिंह परवाल के अनुसार, विभाग अब काटे गए पेड़ों की सटीक गिनती कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
3. स्थानीय विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
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भूमाफियाओं पर आरोप: स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में भूमाफिया सक्रिय हैं जो अवैध निर्माण या प्लॉटिंग के उद्देश्य से इन बगीचों को खत्म कर रहे हैं।
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सख्त कार्रवाई की मांग: वार्ड संख्या 19 के सभासद हेमंत सिंह बिष्ट ने इस मुद्दे को उपजिलाधिकारी (SDM) के समक्ष उठाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई व जुर्माने की मांग की है।
नियमों का उल्लंघन: क्यों है यह गंभीर अपराध?
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फलदार वृक्ष संरक्षण अधिनियम: फल देने वाले पेड़ों को बिना अनुमति काटना कानूनी रूप से अपराध है।
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CTR बफर जोन: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पास होने के कारण यहाँ किसी भी तरह की गतिविधि के लिए कड़े पर्यावरणीय नियमों का पालन अनिवार्य है।
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पर्यावरण को क्षति: एक साथ इतने पुराने पेड़ों का कटना स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को नुकसान पहुँचाता है।
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