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चार साल में यह कैसी उपलब्धि साहब? मुख्यमंत्री की घोषणा से भी बाहर हुआ बिंदुखत्ता का राजस्व गांव

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70 हज़ार लोगो का सपना टूटा,

राजू अनेजा,लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की वर्षों पुरानी उम्मीद पर एक बार फिर शासन ने पानी फेर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बहुप्रतीक्षित घोषणा अब शासन स्तर पर औपचारिक रूप से विलोपित कर दी गई है। नतीजतन, हजारों परिवारों का सपना एक बार फिर अधर में लटक गया है और लोगों में गहरी निराशा व आक्रोश व्याप्त है।
गौरतलब है कि 20 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री ने बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित किए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद वन अधिकार अधिनियम के तहत प्रक्रिया भी आगे बढ़ी और संबंधित पत्रावली जिलास्तरीय समिति से अनुमोदन के बाद शासन स्तर तक पहुंची। लेकिन 2 सितंबर 2024 को शासन ने इस घोषणा को औपचारिक रूप से विलोपित कर दिया।
इस चौंकाने वाले निर्णय का खुलासा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता निवासी उमेश भट्ट द्वारा मांगी गई जानकारी से हुआ है। आरटीआई के जवाब में बताया गया कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने के लिए वन विभाग स्तर से भारत सरकार की अनापत्ति अनिवार्य है। इसके बाद ही शासन को नीतिगत निर्णय लेना होता है। इस प्रक्रिया को जटिल और समयसाध्य बताते हुए 1 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग ने इस घोषणा को विलोपित करने का अनुरोध मुख्यमंत्री कार्यालय से किया था। अंततः मुख्यमंत्री कार्यालय ने प्रस्ताव हटाने का निर्णय ले लिया।
घोषणा के विलोपित होते ही बिंदुखत्ता के हजारों परिवारों के सामने एक बार फिर असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई है। लोगों का कहना है कि वर्षों से केवल आश्वासन और घोषणाएं ही मिल रही हैं, जमीनी हकीकत आज भी वही है।
वन अधिकार अधिनियम के तहत सामूहिक दावे फिर जांच के घेरे में
राजू अनेजा, लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया एक बार फिर अफसरशाही के फेर में उलझ गई है। वन अधिकार अधिनियम के तहत प्रस्तुत सामूहिक दावों को शासन ने पुनः परीक्षण के लिए उपखंड स्तरीय समिति को वापस भेज दिया है।
बिंदुखत्ता के 11,703 परिवारों के सामूहिक दावों को जिला स्तरीय समिति ने स्वीकृत कर 19 जून 2024 को शासन को भेजा था। लेकिन करीब डेढ़ वर्ष बाद 25 अक्टूबर 2025 को शासन ने यह प्रस्ताव जिलाधिकारी को यह कहते हुए लौटा दिया कि इस पर निर्णय लेने का अधिकार जिलाधिकारी स्तर पर ही है। इसके बाद जिलाधिकारी ने 11 नवंबर 2025 को प्रस्ताव को पुनः परीक्षण के लिए उपखंड स्तरीय समिति को भेज दिया।
अब मामले पर विचार के लिए 26 दिसंबर 2025 को हल्द्वानी में उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में उपखंड स्तरीय समिति की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में वन अधिकार समिति बिंदुखत्ता के सचिव को भी आमंत्रित किया गया है।
सवालों के घेरे में शासन और जनप्रतिनिधि
राजनीतिक घोषणाओं, समीक्षा बैठकों और पत्रावलियों के बीच उलझा बिंदुखत्ता आज भी राजस्व गांव बनने से दूर है। स्थानीय लोगों का सवाल साफ है—क्या बिंदुखत्ता की किस्मत में सिर्फ घोषणाओं की बंसी ही बजती रहेगी, या कभी हकीकत में राजस्व गांव का दर्जा मिलेगा?

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