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अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश की दमदार पैरवी, 23.50 लाख की मकान धोखाधड़ी में कोर्ट ने एफआईआर के दिए आदेश

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23.50 लाख रुपये लेकर कब्जा न देने का आरोप, न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आईटीआई थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए

राजू अनेजा,काशीपुर।मकान खरीद-फरोख्त में कथित धोखाधड़ी के एक मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट, काशीपुर की अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आईटीआई थाना पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं। मामले में प्रार्थी नाजिम सुल्तान की ओर से अधिवक्ता श्री संजीव कुमार आकाश ने प्रभावी पैरवी की, जिसके बाद न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए।
प्रार्थी नाजिम सुल्तान ने न्यायालय में दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि अहसान अली व अन्य ने सस्ते मकान का झांसा देकर लगभग 23.50 लाख रुपये में मकान का सौदा किया। बैंक ऋण, डिमांड ड्राफ्ट, चेक और नकद के माध्यम से पूरी धनराशि लेने के बावजूद आज तक मकान का कब्जा नहीं दिया गया।
प्रार्थना पत्र के अनुसार बाद में जानकारी मिली कि संबंधित संपत्ति के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर उसे किसी अन्य व्यक्ति को बेचकर कब्जा भी दे दिया गया। जब प्रार्थी ने अपने रुपये वापस मांगे तो आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित ने पहले आईटीआई थाना पुलिस और बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत भेजी, लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली।
अधिवक्ता श्री संजीव कुमार आकाश ने न्यायालय के समक्ष प्रार्थी का पक्ष रखते हुए मामले में संज्ञेय अपराध होने की दलील दी। उपलब्ध तथ्यों और शपथपत्र का अवलोकन करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया मामला संज्ञेय अपराध का पाया और आईटीआई थाना प्रभारी को एफआईआर दर्ज कर स्वयं अथवा सक्षम अधिकारी से निष्पक्ष विवेचना कराने के निर्देश दिए।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान गिरफ्तारी की आवश्यकता हो तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए।
अब इस मामले में आईटीआई थाना पुलिस न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच करेगी।

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