हल्द्वानी के शिक्षा जगत में उस समय हड़कंप मच गया जब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने निजी स्कूलों और बुक सेलरों के बीच चल रहे अनैतिक ‘कमीशन के खेल’ का पर्दाफाश किया। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के कड़े रुख के बाद अब 46 निजी स्कूलों पर गाज गिरी है।
यहाँ इस प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित स्कूलों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
हल्द्वानी (9 अप्रैल 2026): नैनीताल जिले के जिलाधिकारी के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने निजी स्कूलों की मनमानी की पोल खोल दी है। अभिभावकों की शिकायतों और दुकानों से बरामद ‘स्कूलों की पर्चियों’ ने इस गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
1. जांच में खुले भ्रष्टाचार के पन्ने
मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) गोविंद राम जायसवाल द्वारा जारी नोटिस में स्कूलों की निम्नलिखित गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख है:
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चुनिंदा दुकानों का दबाव: अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए मजबूर करना। दुकानों से स्कूलों के नाम की पर्चियां बरामद होना इसका पुख्ता सबूत है।
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महंगी किताबें: NCERT की सस्ती किताबों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें (जिनमें भारी कमीशन होता है) पाठ्यक्रम में शामिल करना।
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वेबसाइट पर पारदर्शिता का अभाव: स्कूलों ने CBSE निर्देशों के बावजूद अपनी वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर और किताबों की सूची सार्वजनिक नहीं की थी।
2. अल्टीमेटम: 11 अप्रैल तक दें सफाई
प्रशासन ने सभी 46 स्कूलों को 11 अप्रैल 2026 (शाम 5 बजे) तक का समय दिया है।
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कठोर कार्रवाई की चेतावनी: यदि स्कूल संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उनकी मान्यता/संबद्धता (Affiliation) रद्द करने की सिफारिश की जाएगी।
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विधिक कार्रवाई: प्रबंधन के खिलाफ कानूनी और दंडात्मक प्रशासनिक कदम भी उठाए जा सकते हैं।
3. नोटिस पाने वाले प्रमुख स्कूलों की सूची
प्रशासन ने हल्द्वानी के छोटे-बड़े 46 स्कूलों को चिन्हित किया है, जिनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
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प्रमुख स्कूल: आर्यमान विक्रम बिड़ला, दून पब्लिक, इंस्पिरेशन सीनियर सेकेंडरी, शेमफोर्ड, वेदान्तम इंटरनेशनल और सेंट जॉर्ज पब्लिक स्कूल।
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अन्य: ग्रीन सिटी, आदर्श पब्लिक, मानस पब्लिक, नेशनल पब्लिक और विवेकानंद पब्लिक स्कूल सहित कुल 46 संस्थान।
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