लालकुआं (11 मार्च 2026): नगर के जवाहर नगर वार्ड नंबर-3 में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंची ऊर्जा विभाग (UPCL) की टीम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने विभाग पर तानाशाही और अभद्रता का आरोप लगाते हुए कार्य रुकवा दिया और विद्युत उपखंड कार्यालय में जमकर नारेबाजी की।
1. विवाद की मुख्य वजह
विवाद उस समय शुरू हुआ जब विद्युत विभाग की एक टीम बिना किसी पूर्व सूचना के वार्ड में स्मार्ट मीटर लगाने पहुँची।
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बिना सहमति के कार्रवाई: स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उन्हें विश्वास में लिए बिना ही पुराने मीटर बदले जा रहे थे।
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यूपीसीएल की प्लेट पर सवाल: लोगों ने एक निजी वाहन पर यूपीसीएल की प्लेट लगाकर वार्डों में घूमने वाली टीम की कार्यप्रणाली पर भी संदेह जताया।
2. उपखंड कार्यालय पर तीखी नोकझोंक
विरोध बढ़ने पर नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह लोटनी के नेतृत्व में व्यापारी नेता और सभासद सीधे विद्युत उपखंड कार्यालय पहुँच गए। यहाँ:
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अधिकारियों से भिड़ंत: एसडीओ संजय प्रसाद और अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों की तीखी बहस हुई।
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अभद्रता का आरोप: जनप्रतिनिधियों ने टीम के सदस्यों पर स्थानीय लोगों के साथ बदतमीजी करने का गंभीर आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग की।
3. वार्ता और समाधान: मार्च के बाद होगा फैसला
भारी हंगामे और तनावपूर्ण माहौल के बीच विद्युत विभाग और जनप्रतिनिधियों के बीच एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी:
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कार्य पर रोक: फिलहाल पूरे क्षेत्र में स्मार्ट मीटर लगाने का काम रोक दिया गया है।
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साझा बैठक: मार्च माह के समापन के बाद विभाग सभी जनप्रतिनिधियों के साथ एक औपचारिक बैठक करेगा।
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जन-सहमति: बैठक में लिए गए निर्णय और लोगों को जागरूक करने के बाद ही स्मार्ट मीटर लगाने की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
Snapshot: विरोध प्रदर्शन के मुख्य बिंदु
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | जवाहर नगर वार्ड-3 और विद्युत उपखंड कार्यालय, लालकुआं |
| मुख्य नेतृत्व | सुरेंद्र सिंह लोटनी (अध्यक्ष, नगर पंचायत) |
| विभाग की दलील | सरकारी योजना के तहत हो रहा मीटर रिप्लेसमेंट |
| जनता की आपत्ति | पूर्व सूचना का अभाव और अभद्र व्यवहार |
| वर्तमान स्थिति | मार्च माह तक स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक |
निष्कर्ष: लालकुआं की इस घटना ने साफ कर दिया है कि किसी भी नई तकनीकी व्यवस्था को लागू करने से पहले जनता का भरोसा जीतना और पारदर्शिता बरतना आवश्यक है। विभाग और जनप्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बैठक ही अब क्षेत्र में ‘स्मार्ट मीटर’ का भविष्य तय करेगी।
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