
राजू अनेजा,लालकुआं।गर्मियों की छुट्टियां मनाने जम्मू-कश्मीर गए एक परिवार को वापसी के वक्त ऐसा झटका लगा, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। पहले से कंफर्म हो चुका वंदे भारत ट्रेन का टिकट अचानक यात्रा से ठीक पहले वेटिंग में बदल गया, जिससे पूरा परिवार असमंजस और परेशानी में पड़ गया।
बुकिंग के बाद मिला कंफर्मेशन, फिर अचानक पलट गया सिस्टम
हल्दूचौड़ की इंदिरा आवास कॉलोनी निवासी एवं पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में कार्यरत दिवाकर पांडे ने 17 फरवरी को लालकुआं रेलवे स्टेशन के काउंटर से परिवार के साथ यात्रा के लिए टिकट बुक कराए थे।
15 अप्रैल को श्रीनगर से कटरा लौटने के लिए वंदे भारत ट्रेन के चार टिकट शुरू में वेटिंग में थे, लेकिन 25 फरवरी को सभी टिकट कंफर्म हो गए। इसका मैसेज मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली और बिना किसी चिंता के अपनी यात्रा पूरी की।
यात्रा से ठीक पहले आया ‘वेटिंग’ का मैसेज, उड़े होश
वापसी से ठीक एक दिन पहले, 14 अप्रैल को अचानक एक मैसेज आया कि उनका कंफर्म टिकट दोबारा वेटिंग में चला गया है। इस अप्रत्याशित बदलाव ने पूरे परिवार को सकते में डाल दिया।
परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि जब टिकट कंफर्म हो चुका था, तो फिर वह दोबारा वेटिंग में कैसे बदल गया?
रेलवे से नहीं मिला संतोषजनक जवाब
दिवाकर पांडे ने तुरंत रेलवे अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं मिला। टिकट कैंसिल कराने की कोशिश भी बेकार साबित हुई।
पहले कहा गया कि टिकट वहीं से कैंसिल होगा जहां से बुक हुआ है, और बाद में समय सीमा समाप्त होने का हवाला देकर मना कर दिया गया। इससे परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ी।
बच्चों के साथ सफर बना मुश्किल, झेलनी पड़ी दिक्कतें
परिवार का कहना है कि बच्चों के साथ इस तरह की अनिश्चितता में यात्रा करना बेहद मुश्किल हो गया। श्रीनगर से कटरा तक का सफर उन्होंने भारी असुविधा और तनाव के बीच पूरा किया।
रेलवे ने कहा—शिकायत दर्ज कराएं, होगी जांच
मामले को लेकर पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल के सीनियर डीसीएम संजीव शर्मा ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि यात्री को IRCTC में शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
उन्होंने आश्वासन दिया कि लिखित शिकायत मिलने पर विभागीय जांच कराई जाएगी और मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।
सिस्टम पर बड़ा सवाल, यात्रियों का भरोसा डगमगाया
यह घटना रेलवे की टिकटिंग प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। आमतौर पर कंफर्म टिकट दोबारा वेटिंग में नहीं जाता, ऐसे में यह मामला तकनीकी खामी या प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
बड़ा सवाल
👉 क्या अब कंफर्म टिकट भी सुरक्षित नहीं?
👉 क्या रेलवे का सिस्टम भरोसे के लायक रह गया है?
👉 आखिर इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार कौन?
फिलहाल पीड़ित परिवार जवाब और कार्रवाई का इंतजार कर रहा है, लेकिन इस घटना ने हजारों यात्रियों के मन में एक बड़ा डर जरूर बैठा दिया है।
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