उत्तरकाशी: तांबाखानी क्षेत्र से पिछले 10 वर्षों के कूड़े के ढेर को हटाने की मांग को लेकर आंदोलनकारियों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। एक महीने से धरने पर बैठे आंदोलनकारी संतोष सेमवाल ने जब गंगा में जल समाधि लेने का ऐलान किया, तो पूरे जिला प्रशासन और नगर पालिका में हड़कंप मच गया।
🌊 जल समाधि का फैसला और पुलिस का पहरा
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आंदोलनकारी संतोष सेमवाल अपने साथियों विष्णुपाल रावत और गोपीनाथ रावत के साथ मणिकर्णिका घाट की ओर रवाना हुए।
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पुलिस से भिड़ंत: साईं मंदिर के पास पुलिस ने भारी घेराबंदी कर आंदोलनकारियों को रोक लिया। इस दौरान आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
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भावुक क्षण: अपनी मांगों की अनदेखी से दुखी आंदोलनकारी इस दौरान भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि प्रशासन की कुंभकर्णी नींद उन्हें आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर रही है।
🗑️ तांबाखानी कूड़ा डंपिंग जोन: 10 साल की समस्या
आंदोलनकारियों का आरोप है कि तांबाखानी में जमा कूड़ा अब पूरे नगर के लिए सिरदर्द और बीमारी का केंद्र बन चुका है। पिछले 30 दिनों से लगातार धरना देने के बावजूद पालिका प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
🤝 समझौते की मेज पर पहुंचे पालिका अध्यक्ष
स्थिति बिगड़ती देख नगर पालिका अध्यक्ष भूपेंद्र चौहान खुद मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से वार्ता की।
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अध्यक्ष का तर्क: उन्होंने कहा कि वहां 10 साल का कूड़ा जमा है, जिसे हटाने में समय लगना स्वाभाविक है। सफाई का काम पहले से ही चल रहा है।
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बड़ा आश्वासन: अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि मंगलवार को अधिशासी अधिकारी (EO) आंदोलनकारियों को लिखित में आश्वासन देंगे कि एक माह के भीतर सारा कूड़ा वहां से हटा लिया जाएगा।
⚠️ ‘मांग पूरी नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन’
पालिका अध्यक्ष के लिखित आश्वासन के वादे के बाद आंदोलनकारियों ने अपना जल समाधि का कार्यक्रम फिलहाल टाल दिया है और वे वापस धरना स्थल पर लौट आए हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर कूड़ा निस्तारण का कार्य पूरा नहीं हुआ, तो वे इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे।
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