हिमालय प्रहरी

गढ़ीनेगी का रण: सचिन बनाम अभिषेक, कांटे की टक्कर ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

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राजू अनेजा, गढ़ीनेगी। आगामी 9 जून को होने वाले नगर पंचायत चुनाव को लेकर गढ़ीनेगी का सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनावी मैदान में भाजपा प्रत्याशी सचिन बाठला और निर्दलीय प्रत्याशी अभिषेक सुखीजा के बीच सीधी भिड़ंत ने मुकाबले को बेहद रोचक बना दिया है। क्षेत्र में दोनों प्रत्याशी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, लेकिन मतदाता अभी भी अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं दिख रहा है।

विकास बनाम बदलाव के वादे पर चुनाव

भाजपा प्रत्याशी सचिन बाठला अपने पूर्व में कराए गए विकास कार्यों को लेकर घर-घर पहुंच रहे हैं। वह जनता को नगर पंचायत गठन के बाद क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की याद दिलाते हुए समर्थन मांग रहे हैं। दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी अभिषेक सुखीजा गढ़ीनेगी को मॉडल नगर पंचायत बनाने का वादा कर मतदाताओं से बदलाव के नाम पर एक मौका देने की अपील कर रहे हैं।

पंजाबी वोटर खामोश, ओबीसी मतदाता बनेगा निर्णायक

चुनावी समीकरणों पर नजर डालें तो दोनों प्रमुख प्रत्याशी पंजाबी समुदाय से आते हैं। ऐसे में पंजाबी मतदाताओं का रुझान फिलहाल खुलकर सामने नहीं आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में ओबीसी मतदाता हार-जीत का बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है। यही वर्ग चुनावी नतीजों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

मतदाताओं की चुप्पी बढ़ा रही प्रत्याशियों की बेचैनी

चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंच रहा है, लेकिन मतदाताओं की खामोशी ने दोनों खेमों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं। चौपालों, बाजारों और गलियों में चुनावी चर्चाएं जरूर हैं, मगर वोट किसके पक्ष में जाएगा, इस पर लोग खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

समर्थकों में जबरदस्त जोश

स्थानीय निकाय चुनाव होने के कारण दोनों प्रत्याशियों के समर्थकों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह से देर रात तक जनसंपर्क, नुक्कड़ बैठकों और प्रचार अभियानों का दौर जारी है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं।

एक सप्ताह बाकी, मुकाबला पूरी तरह खुला

मतदान में अभी करीब एक सप्ताह का समय शेष है। ऐसे में चुनावी तस्वीर हर दिन बदलती नजर आ रही है। मौजूदा हालात में किसी भी प्रत्याशी को बढ़त मिलती दिखाई नहीं दे रही। यही वजह है कि गढ़ीनेगी नगर पंचायत का चुनाव क्षेत्र के सबसे दिलचस्प मुकाबलों में शामिल हो गया है। अब जनता का फैसला किसके सिर जीत का ताज सजाएगा, इसका जवाब 9 जून को मतदान और उसके बाद मतगणना में मिलेगा।
फिलहाल गढ़ीनेगी में एक ही चर्चा है— मुकाबला कांटे का है, बाजी कौन मारेगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

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