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मिठाई की मिठास में दबी जांच की आंच, मसालों पर लगा कार्रवाई का तड़का!

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45 मिठाइयों के नमूने पास, मसालों के 39 में से 14 अधोमानक मिले; खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के तरीके पर उठे सवाल

राजू अनेजा, काशीपुर। त्योहारों का मौसम है, बाजार मिठाइयों से सजे हैं और खाद्य सुरक्षा विभाग भी शुद्धता की जांच में जुटा है। लेकिन रुद्रपुर में हुई जांच के नतीजों ने विभाग की कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मिठाई प्रतिष्ठानों से लिए गए सभी 45 नमूने मौके पर जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि सब्जी मंडी में बिक रहे मसालों के 39 नमूनों में से 14 अधोमानक निकले। यानी मिठाइयों की जांच में पूरी राहत और मसालों की जांच में गड़बड़ी का बड़ा खुलासा!

मिठाइयों के सभी नमूनों का पास होना निश्चित रूप से राहत की बात है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या मौके पर मोबाइल लैब से की गई जांच ही गुणवत्ता की अंतिम कसौटी है? कहीं जांच की प्रक्रिया में कोई ऐसी कमी तो नहीं रह गई, जिसकी वजह से कुछ सवाल अनुत्तरित रह गए? हालांकि, उपलब्ध तथ्यों में किसी तरह की रिश्वत या मिलीभगत का प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन जांच के नतीजों ने निष्पक्षता और निगरानी को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी है।

मिठाई प्रतिष्ठानों पर जांच, सभी 45 नमूने पास

दीपावली से पहले बृहस्पतिवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने रुद्रपुर के प्रमुख मिठाई प्रतिष्ठानों और सब्जी मंडी में अभियान चलाया। मंगलम, बीकानेर, नवरंग और रूपम समेत अन्य प्रतिष्ठानों से मिठाइयों के 45 नमूने लिए गए। मोबाइल फूड लैब में मौके पर हुई जांच में सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए। मिठाइयों के सभी नमूनों का पास होना राहत जरूर देता है, लेकिन खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर नियमित और विस्तृत निगरानी की जरूरत भी बनी हुई है।

मसालों की जांच में खुली गुणवत्ता की पोल, 14 नमूने फेल

मिठाइयों के बाद जब टीम सब्जी मंडी पहुंची और हल्दी, मिर्च तथा धनिया पाउडर की जांच की गई तो तस्वीर बदल गई। कुल 39 नमूनों में से 14 अधोमानक पाए गए। यानी जांचे गए मसालों के करीब 36 प्रतिशत नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। विभाग के अनुसार इनमें रंग और मिलावट की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई।

अधोमानक मिले नमूनों को सील कर आगे की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बोरियों में बिक रहे मसाले, उपभोक्ता आखिर भरोसा किस पर करें?

जांच के दौरान सब्जी मंडी और मीट मार्केट के आसपास खुले मसालों की बिक्री का मामला भी सामने आया। कई दुकानों पर मसाले बोरियों में रखकर बेचे जा रहे हैं। इन पर ब्रांड, पैकिंग की तारीख, बैच नंबर और अन्य जरूरी विवरण उपलब्ध नहीं होने से उपभोक्ताओं के लिए उनकी उत्पत्ति और गुणवत्ता का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।

कुछ स्थानों पर मसाले सब्जियों और मांस के नजदीक रखे होने से धूल, नमी और अस्वच्छ परिस्थितियों के संपर्क में आने की आशंका भी है। हालांकि खुले मसालों की बिक्री अपने आप में मिलावट का प्रमाण नहीं है, लेकिन उनकी गुणवत्ता और आपूर्ति की जवाबदेही तय करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।

सिर्फ नमूने सील करने से नहीं चलेगा काम

अब सवाल यह है कि जिन मसालों के नमूने अधोमानक मिले, वे बाजार में कहां से पहुंचे? इन्हें तैयार करने वाले कौन हैं और इनकी आपूर्ति करने वालों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा? क्या कार्रवाई केवल फुटकर दुकानदारों तक सीमित रहेगी या विभाग उन स्रोतों तक भी पहुंचेगा, जहां से ऐसे मसालों की आपूर्ति हो रही है?

खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने अब असली चुनौती सिर्फ नमूने लेने की नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति शृंखला की जांच कर जवाबदेही तय करने की है।

सीएमओ बोले, मिलावटी मसालों से रहें सावधान

सीएमओ डॉ. एसके गोस्वामी ने मिलावटी मसालों को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताते हुए लोगों से खुले और बिना पैकिंग वाले मसाले खरीदने से बचने की अपील की है। उन्होंने ब्रांडेड और एगमार्क वाले मसाले खरीदने तथा मिलावट की शिकायत खाद्य सुरक्षा विभाग या सीएमओ कार्यालय में दर्ज कराने की सलाह दी है।

मिठास की जांच या मसालों पर सख्ती, निगरानी का पैमाना एक हो!

रुद्रपुर की यह जांच एक बड़ा सवाल छोड़ गई है। मिठाई हो या मसाला, दोनों सीधे आम आदमी की थाली और सेहत से जुड़े हैं। मिठाइयों के सभी नमूने पास होना अच्छी बात है, लेकिन मसालों के 14 नमूनों का अधोमानक मिलना भी कम गंभीर नहीं है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग को त्योहारों के साथ-साथ पूरे साल समान गंभीरता से जांच अभियान चलाना होगा।

क्योंकि सवाल सिर्फ मिठाई की मिठास का नहीं, आम आदमी की रसोई में पहुंचने वाले हर खाद्य पदार्थ की शुद्धता का है।

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