राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर में भू माफियाओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। माफियाओं के दबाव और प्रशासनिक उदासीनता से त्रस्त होकर सुखवंत की आत्महत्या ने काशीपुर को झकझोर दिया था, लेकिन इसके बावजूद सिस्टम चेतता नजर नहीं आ रहा। सुखवंत प्रकरण की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि अब एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक विधवा महिला की 4.5 बीघा कृषि भूमि पर छह वर्षों से कब्जा किए जाने का आरोप लगा है।
यह मामला साफ संकेत देता है कि सुखवंत की मौत भी भूमाफियाओं के हौसले तोड़ने के बजाय उन्हें और बेखौफ कर गई है। पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन राजस्व तंत्र आज भी फाइलों और तारीखों के जाल में उलझा हुआ है।
ग्राम गिन्नीखेड़ा निवासी बलविंदर कौर पत्नी स्व. लखविंदर सिंह ने बहुउद्देशीय शिविर में मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी को ज्ञापन सौंपकर बताया कि ग्राम बांसखेड़ा कला स्थित उनकी भूमि खाता संख्या 00237, खसरा संख्या 1/11, रकबा 0.2800 हेक्टेयर (करीब 4.5 बीघा) है, जो राजस्व रिकॉर्ड में उनके और उनके दो पुत्रों पलविंदर सिंह व कुलवंत सिंह के नाम दर्ज है।
महिला का आरोप है कि छह वर्ष पूर्व भूमाफियाओं ने जमीन पर कब्जा कर लिया, तब से वह खेती नहीं कर पा रही हैं। जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए उन्होंने एसडीएम काशीपुर की अदालत में तीन बार पैमाइश के लिए आवेदन किया, लेकिन आज तक न तो पैमाइश हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि पैसे के दम पर फाइलों को दबा दिया गया, ठीक उसी तरह जैसे सुखवंत मामले में भी पीड़ित पक्ष न्याय के लिए भटकता रहा था। सवाल यह है कि जब सुखवंत जैसे मामले ने एक जान ले ली, तो क्या प्रशासन अब भी किसी और त्रासदी का इंतजार कर रहा है?
मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ दिवेश शासनी ने तहसीलदार पंकज चंदोला को कार्रवाई के निर्देश जरूर दिए हैं, लेकिन जमीन पर कार्रवाई कब होगी, यह अब भी बड़ा सवाल बना हुआ है।
सुखवंत की आत्महत्या के बाद भी अगर भूमाफियाओं पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो यह साफ है कि काशीपुर में कानून नहीं, दबंगों का राज चल रहा है—और अगला सुखवंत कौन होगा, यह कोई नहीं जानता।