
देहरादून। उत्तर प्रदेश से डीएलएड (D.El.Ed) की डिग्री हासिल कर उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक की नौकरी पाने वाले 11 जिलों के 152 शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने इन सभी शिक्षकों को नोटिस जारी कर उनके शैक्षणिक व निवास संबंधी अभिलेखों की गहन जांच शुरू कर दी है। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर को छोड़कर राज्य के अन्य 11 जिलों के शिक्षकों को इसमें सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें सर्वाधिक 43 शिक्षक अकेले पिथौरागढ़ जिले से हैं।
स्थायी निवास प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़े की आशंका
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 2,906 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें उत्तराखंड का स्थायी निवासी और डीएलएड उत्तीर्ण होना अनिवार्य था। प्रक्रिया के तहत करीब 2,400 अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी गईं। हालांकि, बाद में शिकायतें मिलीं कि कई अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश में डीएलएड में दाखिला लेने के लिए वहां का फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनवाया और फिर उत्तराखंड में नौकरी पाने के लिए यहां का स्थायी निवास प्रमाण पत्र पेश कर दिया।
नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के.एस. रावत ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2024 के दौरान उत्तर प्रदेश में डीएलएड प्रवेश के लिए वहां का स्थायी निवासी होना अनिवार्य था। ऐसे में यदि किसी अभ्यर्थी ने उत्तराखंड का निवासी होते हुए यूपी से डीएलएड किया है, तो उनके अभिलेखों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) स्तर पर अगले सप्ताह इन शिक्षकों के अभिलेखों की जांच और सुनवाई की जाएगी। जांच में धांधली या फर्जीवाड़ा साबित होने पर संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। निदेशक ने यह भी साफ किया कि अन्य राज्यों से प्राप्त वैध डीएलएड प्रमाण पत्र उत्तराखंड में पूरी तरह मान्य हैं।
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