
नैनीताल। शहर के मल्लीताल (वर्तमान भीमताल निवासी) की अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी लतिका भंडारी को उत्तराखंड के प्रतिष्ठित ‘तीलू रौतेली पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने पर स्वजनों और खेल प्रेमियों में हर्ष की लहर है। असम राइफल्स से सेवानिवृत्त पिता महेंद्र सिंह और गृहिणी मां नीमा भंडारी की बेटी लतिका ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई के साथ ताइक्वांडो सीखा और देश व प्रदेश को गौरवान्वित किया। वर्तमान में मुंबई में आयकर विभाग में खेल कोटे के तहत कार्यरत लतिका ने 2007 में नैनीताल से अपने करियर की शुरुआत की थी। वे विश्व रैंकिंग के शीर्ष 20 (अंडर-19 में 53 किग्रा वर्ग में सर्वोच्च रैंक 19) में पहुंचने वाली देश की पहली भारतीय ताइक्वांडो खिलाड़ी बनीं।
पदकों की लंबी फेहरिस्त और ऐतिहासिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड
25 से अधिक वर्षों के खेल करियर में लतिका ने 10 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक और सीनियर नेशनल व नेशनल गेम्स में लगातार 10+ वर्षों तक नंबर-1 खिलाड़ी रहने का रिकॉर्ड बनाया है। वे एशियन और कॉमनवेल्थ दोनों चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय हैं। उन्होंने साउथ एशियन गेम्स में 2 स्वर्ण व 1 रजत, कॉमनवेल्थ में 1 स्वर्ण व 1 रजत, एशियन चैंपियनशिप में कांस्य तथा प्रेसिडेंट्स कप में रजत पदक हासिल किया है। इसके अलावा 38वें नेशनल गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाली लतिका को पूर्व में विक्रम अवार्ड (2012), स्पोर्ट्स टाइम्स अवार्ड (2013) और ब्रिक्स (BRICS) से ट्रेलब्लेजर अवार्ड 2025 से भी नवाजा जा चुका है।
साई और एमपी अकादमी के बाद अब भारतीय टीम का कर रही हैं मार्गदर्शन
लतिका का नाम फिजिकल एजुकेशन बुक के ‘लीजेंड कॉर्नर’ और ‘शेरोज बुक’ में भारत की 100 प्रेरणादायक महिलाओं में दर्ज है। सक्रिय खिलाड़ी रहते हुए भी उन्होंने 6 वर्षों तक एमपी अकादमी व भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में कोचिंग दी। लेवल-I और II प्रमाणित अंतरराष्ट्रीय कोच लतिका वर्तमान में एशियन यूनियन में कमेटी मेंबर हैं और 2025-26 जूनियर व अंडर-21 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारतीय टीम की कोच के रूप में युवा प्रतिभाओं को तराश रही हैं। लतिका का कहना है कि एक कोच के रूप में उनका जीवन देश में खेल विकास के लिए पूरी तरह समर्पित है।