देहरादून। उत्तराखंड के संगठित और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए धामी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 7 अगस्त को आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने केंद्र के श्रम सुधारों के तहत दो नई नियमावलियों—’उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026′ और ‘उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026’ को हरी झंडी दे दी है। श्रम कानूनों के सरलीकरण और कामगारों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
डिजिटल माध्यम से हर माह की 7 तारीख तक भुगतान और समान काम का समान वेतन
‘उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026’ के तहत अब सभी प्रतिष्ठानों, फैक्ट्रियों और निर्माण कार्यों में लगे कामगारों को हर महीने की 7 तारीख तक मजदूरी का भुगतान करना अनिवार्य होगा। मजदूरी में हेराफेरी और अनाधिकृत कटौती रोकने के लिए वेतन का डिजिटल भुगतान किया जाएगा। नियमावली में तय कार्य घंटों से अधिक काम करने पर दोगुना ओवर-टाइम देने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके अलावा लैंगिक भेदभाव समाप्त करते हुए महिला एवं पुरुष श्रमिकों को ‘समान काम के लिए समान वेतन’ देना अनिवार्य कर दिया गया है।
औद्योगिक संबंध नियमावली 2026: विवादों का त्वरित निस्तारण, छंटनीग्रस्त श्रमिकों को री-स्किलिंग फंड
‘उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026’ का मुख्य उद्देश्य मालिक और श्रमिकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और विवादों का समयबद्ध समाधान करना है। जिन संस्थानों में 20 या उससे अधिक कर्मचारी हैं, वहां इन-हाउस शिकायत निवारण समिति का गठन होगा। साथ ही अचानक होने वाली हड़ताल या तालाबंदी को रोकने के लिए पूर्व नोटिस के नियम तय किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान के तहत छंटनी किए गए कर्मचारियों को पुनः रोजगार के अवसर देने और नया हुनर सिखाने के लिए ‘श्रमिक री-स्किलिंग फंड’ की स्थापना की जाएगी। सरकार का मानना है कि ये दोनों नियमावलियां राज्य के उद्योग जगत को नई दिशा देने के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा में मील का पत्थर साबित होंगी।