केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज (1 फरवरी, 2026) संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया, जिसमें उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए ‘इको-फ्रेंडली माउंटेन ट्रेल्स’ का एक बड़ा रोडमैप पेश किया गया है। यह योजना उत्तराखंड को वैश्विक ट्रेकिंग मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।
यहाँ बजट की इस घोषणा और इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है:
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग का अनुभव प्रदान करने की अपार क्षमता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं:
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टिकाऊ बुनियादी ढांचा: ये ट्रेल्स संकीर्ण (narrow), टिकाऊ और पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (ecologically sustainable) होंगी, ताकि हिमालय के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न पहुँचे।
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विविध गतिविधियां: इन मार्गों पर केवल पैदल यात्रा ही नहीं, बल्कि माउंटेन बाइकिंग, हाइकिंग और घुड़सवारी जैसी साहसिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।
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डिजिटल और स्किलिंग: बजट में 10,000 गाइडों को प्रशिक्षित करने के लिए एक पायलट प्रोग्राम और ‘नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड’ बनाने का भी प्रस्ताव है, जो इन ट्रेल्स की वैश्विक पहुंच बढ़ाएगा।
💼 उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
उत्तराखंड में वर्तमान में लगभग 50 विश्व स्तरीय ट्रेकिंग रूट्स हैं, जिनका वार्षिक कारोबार करीब ₹100 करोड़ आंका जाता है। बजट की इस नई पहल से:
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पलायन पर रोक: पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार (गाइड, होमस्टे, पोर्टर) सृजित होंगे, जिससे युवाओं को रोजगार के लिए शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।
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स्थानीय आजीविका: होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलेगा।
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राजस्व में वृद्धि: साहसिक पर्यटन के व्यवस्थित होने से राज्य के पर्यटन राजस्व में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
🗣️ मुख्यमंत्री धामी और जानकारों की प्रतिक्रिया
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पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री): उन्होंने इसे ‘विकसित भारत-2047’ के संकल्प की दिशा में एक दूरदर्शी कदम बताया। सीएम ने कहा कि यह केवल पर्यटन नहीं, बल्कि राज्य की ग्रामीण और पर्वतीय अर्थव्यवस्था को ‘ऑक्सीजन’ देने जैसा है।
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विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि यह पहल उत्तराखंड के लोकप्रिय ट्रेक जैसे फूलों की घाटी, रूपकुंड, केदारकांठा और पिलग्रिम ट्रेल्स को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में मदद करेगी।
📋 अन्य राज्यों के लिए भी सौगात
बजट में न केवल हिमालयी राज्यों, बल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी समान ‘ट्रेल्स’ की घोषणा की गई है:
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पूर्वी घाट: अराकू वैली (आंध्र प्रदेश)।
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पश्चिमी घाट: पोटीगाई मलाई (तमिलनाडु)।
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तटीय क्षेत्र: ओडिशा, कर्नाटक और केरल में ‘टर्टल ट्रेल्स’ (कछुआ संरक्षण पर्यटन)।
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