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निर्बल और असहाय बच्चों के भविष्य को नई उड़ान दे रहीं उर्वशी , बेसहारा बच्चों के हाथों में थमा रहीं आत्मनिर्भरता की मजबूत डोर

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राजू अनेजा,काशीपुर। समाज में अक्सर निर्बल और असहाय बच्चों के लिए सहानुभूति तो दिखाई जाती है, लेकिन उनके भविष्य को संवारने के लिए ठोस प्रयास कम ही देखने को मिलते हैं। ऐसे में डी बाली ग्रुप की चेयरमेन उर्वशी दत्त बाली ने एक ऐसी पहल की है, जो इन बच्चों के जीवन को नई दिशा देने का काम कर रही है।


उर्वशी दत्त बाली ने यह साबित कर दिया है कि जरूरत सिर्फ मदद की नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और अवसर देने की है। उन्होंने क्षेत्र के बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास की अलख जगाई है। उनकी इस पहल से कई बच्चों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगी है।
डी बाली ग्रुप द्वारा संचालित कार्यक्रमों के तहत गरीब और असहाय बच्चों—खासकर बालिकाओं—को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, और अन्य रोजगारपरक कोर्स शामिल हैं। इन कोर्सों का उद्देश्य केवल हुनर सिखाना नहीं, बल्कि बच्चों को इस काबिल बनाना है कि वे भविष्य में किसी के सामने हाथ फैलाने की बजाय अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उर्वशी दत्त बाली इससे पहले भी कई सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती रही हैं। गरीब परिवारों की सहायता हो या बेटियों के सशक्तिकरण की पहल, हर क्षेत्र में उनका योगदान प्रेरणादायक रहा है।
इस पहल की खास बात यह है कि यहां बच्चों को सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी सिखाया जा रहा है। उन्हें जीवन के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया जा रहा है, ताकि वे हर परिस्थिति में मजबूती से खड़े रह सकें।
इसी क्रम में उर्वशी दत्त बाली ने चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए समाज से एक भावुक अपील भी की। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलजुल कर गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए आगे आना चाहिए और उनके भविष्य को संवारने में अपना योगदान देना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा किया गया एक छोटा सा परोपकारी कार्य भी किसी जरूरतमंद के जीवन को नई दिशा दे सकता है।
आज के दौर में जब कई बच्चे हालातों के चलते गलत रास्तों की ओर मुड़ जाते हैं, ऐसे समय में उर्वशी दत्त बाली की यह पहल उनके लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
यह पहल एक मजबूत संदेश देती है—दया नहीं, दिशा जरूरी है।
अगर समाज के अन्य लोग भी इस सोच के साथ आगे आएं, तो निश्चित ही कई बेसहारा बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सकता है।

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