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उत्तराखंड विधानसभा विशेष सत्र: सदन के गेट पर विधायक ने पलटी गन्ने से भरी ट्रॉली; महिला आरक्षण पर घमासान और तीखी नोकझोंक

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देहरादून (28 अप्रैल 2026): उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र का आगाज मंगलवार को भारी हंगामे के साथ हुआ। महिला आरक्षण के मुद्दे पर बुलाई गई इस बैठक में सदन के भीतर शब्दों के बाण चले, तो वहीं विधानसभा परिसर के बाहर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति के ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विधानसभा गेट तक पहुँचने और वहां गन्ना पलटने से सुरक्षाकर्मियों में अफरा-तफरी मच गई।

विधानसभा गेट पर ‘ट्रैक्टर प्रदर्शन’

सत्र की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले झबरेड़ा विधायक वीरेंद्र जाति ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर विधानसभा परिसर के मुख्य द्वार पर पहुँच गए। सुरक्षा घेरे को ठेंगा दिखाते हुए उन्होंने ट्रॉली में लदा गन्ना गेट पर ही पलट दिया।

  • प्रमुख मांग: विधायक ने आरोप लगाया कि इकबालपुर चीनी मिल पर किसानों का 110 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए तत्काल भुगतान की मांग की।

सदन के भीतर महिला आरक्षण पर रार

सत्र की मुख्य कार्यवाही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर केंद्रित रही, जहाँ विपक्ष और सरकार के बीच जमकर बहस हुई:

  • कांग्रेस का संकल्प प्रस्ताव: विपक्ष ने मांग रखी कि महिला आरक्षण को आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से ही मौजूदा सीटों पर लागू किया जाए। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

  • निंदा प्रस्ताव की तैयारी: सरकार की ओर से उन विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी है, जिन्होंने संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के खिलाफ मतदान किया था।

मुख्यमंत्री धामी का विपक्ष पर प्रहार

चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा:

“कांग्रेस ने कभी बहन-बेटियों के भविष्य के बारे में नहीं सोचा, बल्कि उनके अधिकारों को छीनने का काम किया है। हमारी सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। आज देवभूमि की महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और यह आरक्षण उनकी भागीदारी को और मजबूत करेगा।”

विपक्ष की घेराबंदी

विपक्ष ने भी एकजुट होकर महिला अपराधों और अंकिता भंडारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब तक आरक्षण को तत्काल प्रभावी नहीं किया जाता, तब तक यह केवल एक चुनावी स्टंट है।

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