उत्तराखंड में परिसीमन (Delimitation) को लेकर सामने आया यह नया फॉर्मूला राज्य की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने वाला है। 2011 की जनगणना को आधार मानकर सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि का यह प्रस्ताव पर्वतीय और मैदानी, दोनों क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व के ढांचे को नया स्वरूप देगा।
यहाँ इस नए परिसीमन फॉर्मूले और सीटों के गणित का पूरा विश्लेषण दिया गया है:
देहरादून (17 अप्रैल 2026): राज्य में सीटों के नए बंटवारे के लिए वर्ष 2011 की जनसंख्या (1,00,86,292) को आधार बनाया गया है। इस फॉर्मूले के लागू होने से विधानसभा में 35 और लोकसभा में 3 नई सीटें जुड़ जाएंगी।
1. सीटों का नया गणित: विधानसभा और लोकसभा
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विधानसभा: वर्तमान 70 सीटों में 50% (35 सीटें) की वृद्धि के साथ अब कुल संख्या 105 होगी।
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लोकसभा: वर्तमान 5 सीटों में 50% (2.5, जिसे 3 माना गया है) की वृद्धि के साथ अब कुल संख्या 8 होगी।
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लोकसभा बनाम विधानसभा: अभी एक लोकसभा सीट के अंतर्गत 14 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। नई व्यवस्था में 7 लोकसभा सीटों में 13-13 और एक सीट में 14 विधानसभा क्षेत्र होने की संभावना है।
2. पहाड़ बनाम मैदान: कहाँ कितनी बढ़ीं सीटें?
परिसीमन का सबसे बड़ा असर जनसंख्या के घनत्व के आधार पर दिख रहा है:
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मैदानी जिले (4): देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर में कुल 18 सीटें बढ़ने जा रही हैं।
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पर्वतीय जिले (9): उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा और चंपावत में कुल 12 सीटें बढ़ेंगी।
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जनसंख्या का औसत: पहाड़ में प्रति विधानसभा सीट औसत जनसंख्या 86,454 होगी, जबकि मैदान में यह 1,05,665 रहेगी।
3. जिलेवार सीटों का नया स्वरूप (Table)
| जिला | वर्तमान सीटें | प्रस्तावित नई सीटें | कुल सीटें (परिसीमन बाद) |
| हरिद्वार | 11 | +07 | 18 |
| देहरादून | 10 | +06 | 16 |
| ऊधम सिंह नगर | 09 | +07 | 16 |
| नैनीताल | 06 | +03 | 09 |
| पौड़ी | 06 | +02 | 08 |
| अल्मोड़ा | 06 | +01 | 07 |
| टिहरी | 06 | +01 | 07 |
| पिथौरागढ़ | 04 | +02 | 06 |
| चमोली | 04 | +01 | 05 |
| उत्तरकाशी | 03 | +01 | 04 |
| रुद्रप्रयाग | 02 | +01 | 03 |
| बागेश्वर | 02 | +01 | 03 |
| चंपावत | 02 | +01 | 03 |
प्रमुख बिंदु: परिसीमन का प्रभाव
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मैदानी जिलों का दबदबा: हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे जिलों में सीटों की संख्या में भारी उछाल आया है (प्रत्येक में 7-7 सीटों की वृद्धि)। देहरादून भी अब 16 सीटों वाला जिला होगा।
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पर्वतीय प्रतिनिधित्व: हालांकि पहाड़ में सीटें बढ़ी हैं, लेकिन मैदानी जिलों के मुकाबले यह वृद्धि कम है, जिससे भविष्य में राज्य की राजनीति का केंद्र और अधिक मैदानी क्षेत्रों की ओर खिसक सकता है।
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आधार वर्ष: 2026 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना को आधार बनाना एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो परिसीमन की प्रक्रिया को गति प्रदान करेगा।
Snapshot: उत्तराखंड नया परिसीमन फॉर्मूला
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कुल विधानसभा: 105 (70 + 35)
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कुल लोकसभा: 08 (5 + 3)
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आधार वर्ष: 2011 की जनगणना
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सर्वाधिक लाभ: हरिद्वार (18 सीटें)
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न्यूनतम सीटें: रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चंपावत (3-3 सीटें)
निष्कर्ष: यह परिसीमन उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों और बढ़ती जनसंख्या के बीच संतुलन बनाने का एक प्रयास है। 105 सीटों वाली विधानसभा के बाद क्षेत्रीय विकास और राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
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