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उत्तराखंड: नए शिक्षा सत्र का शंखनाद; सरकारी स्कूलों में ‘प्रवेशोत्सव’ की धूम, बदला स्कूलों का समय, 5400 से अधिक निजी स्कूलों में भी लौटी रौनक

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देहरादून/अल्मोड़ा (1 अप्रैल 2026): बुधवार को प्रदेश के हजारों स्कूलों के द्वार खुलते ही छात्र-छात्राओं का उत्साह चरम पर दिखा। नई कक्षाएं, नई किताबें और नए दोस्तों के साथ बच्चों ने स्कूल परिसर में कदम रखा।

1. सरकारी स्कूलों में ‘प्रवेशोत्सव’ और विशेष रणनीति

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEOs) को सख्त निर्देश जारी किए हैं:

  • अनिवार्य आयोजन: कक्षा 1 से 12वीं तक के लिए प्रवेशोत्सव मनाना अनिवार्य है। इसकी दैनिक रिपोर्ट सीधे निदेशालय को भेजी जाएगी।

  • ब्रांडिंग: सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर पेश किया जा रहा है। शिक्षकों को निर्देश हैं कि वे अभिभावकों को स्कूल में उपलब्ध संसाधनों, सुविधाओं और शैक्षिक गुणवत्ता की जानकारी दें।

  • स्वागत सत्कार: अल्मोड़ा के कमलेश्वर इंटर कॉलेज जैसे स्कूलों में नए बच्चों का स्वागत विशेष कार्यक्रमों और निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों के वितरण के साथ किया गया।

2. गर्मी के कारण बदला समय (School Timings)

बढ़ते तापमान और ग्रीष्मकाल को देखते हुए स्कूलों के संचालन समय में बदलाव किया गया है:

  • संचालन: अधिकतर स्कूल सुबह 7:30 बजे से शुरू हुए।

  • छुट्टी: विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूर्वाह्न 11:00 बजे स्कूलों में छुट्टी कर दी गई।

3. नामांकन में वृद्धि की उम्मीद

अल्मोड़ा और काशीपुर जैसे नगरों से सकारात्मक खबरें आ रही हैं। राजकीय इंटर कॉलेज अल्मोड़ा में अब तक 120 नए प्रवेश हो चुके हैं। शिक्षा विभाग का मानना है कि ‘प्रवेशोत्सव’ के माध्यम से न केवल नए छात्र जुड़ेंगे, बल्कि पुराने छात्रों की उपस्थिति भी सुनिश्चित होगी।


राज्य में विद्यालयों का सांख्यिकीय ढांचा (Statstics)

उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था का विस्तार काफी व्यापक है। वर्तमान में संचालित विद्यालयों की संख्या इस प्रकार है:

विद्यालय का प्रकार संख्या
राजकीय प्राथमिक विद्यालय 11,580
राजकीय माध्यमिक विद्यालय 933
राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) 1,385
सहायता प्राप्त (Aided) विद्यालय 612
निजी (Private) विद्यालय 5,396

अभिभावकों और छात्रों के लिए मुख्य बिंदु

  • निःशुल्क पुस्तकें: सरकारी स्कूलों में प्रवेश के साथ ही पात्र छात्रों को शासन द्वारा निर्धारित पुस्तकें वितरित की जा रही हैं।

  • अनुशासन पर जोर: पहले दिन ही शिक्षकों ने बच्चों को नियमित पढ़ाई और अनुशासन के प्रति प्रेरित किया।

  • निगरानी: निदेशालय स्तर से हर जिले के नामांकन डेटा की वास्तविक समय (Real-time) निगरानी की जा रही है।

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