उत्तराखंड के शिक्षा विभाग और NCERT की किताबों के दामों में भारी अंतर ने राज्य के अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। एक ही कंटेंट, समान पेज संख्या और समान चैप्टर होने के बावजूद उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित किताबें 35 से 80 प्रतिशत तक महंगी बेची जा रही हैं।
समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ की पड़ताल के बाद अब शासन ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। यहाँ इस पूरे प्रकरण का विस्तृत विवरण और तुलनात्मक विश्लेषण दिया गया है:
हल्द्वानी/देहरादून (8 अप्रैल 2026): मुफ्त और सस्ती शिक्षा के सरकारी दावों के बीच ‘किताबों के खेल’ ने अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। मामला तूल पकड़ने के बाद शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने इस विसंगति की रिपोर्ट तलब की है।
1. मूल्य तुलना: पड़ताल में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
पड़ताल के दौरान देखा गया कि कक्षा 1 से लेकर कक्षा 6 तक की किताबों के दामों में बड़ा अंतर है, जबकि पन्नों की संख्या और पाठ (Content) बिल्कुल एक जैसा है।
| कक्षा | विषय/किताब | पेज संख्या | NCERT मूल्य (₹) | उत्तराखंड बोर्ड मूल्य (₹) | अंतर (₹) |
| कक्षा 1 | अंग्रेजी (मृदंग) | 119 | 65.00 | 99.80 | 34.80 |
| कक्षा 6 | हिंदी (सारंगी) | 114 | 65.00 | 99.80 | 34.80 |
| कक्षा 6 | विज्ञान | 252 | 65.00 | 117.92 | 52.92 |
2. विभाग का तर्क: टेंडर और रॉयल्टी का हवाला
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे निम्नलिखित कारण बताए हैं:
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NCERT की असमर्थता: अफसरों का कहना है कि जब NCERT ने पर्याप्त संख्या में किताबें छापने में असमर्थता जताई, तब राज्य सरकार ने स्वयं प्रकाशन का निर्णय लिया।
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प्रकाशन लागत: राज्य सरकार इन किताबों को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से निजी प्रकाशकों से छपवाती है। इसमें कागज की खरीद, छपाई और वितरण का खर्च NCERT के मुकाबले अधिक आता है।
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रॉयल्टी: राज्य को NCERT के कंटेंट का उपयोग करने के लिए रॉयल्टी भी चुकानी पड़ती है।
3. अभिभावकों का आक्रोश
अभिभावक गौरव पंत और अन्य का कहना है कि जब सरकार ‘एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम’ की बात करती है, तो किताबों के रेट भी समान होने चाहिए। विकल्प के नाम पर अभिभावकों से 35-45% अतिरिक्त वसूली करना ‘सस्ती शिक्षा’ के दावों के विपरीत है।
4. शासन की कार्रवाई: महानिदेशक ने मांगी रिपोर्ट
मामला सुर्खियों में आने के बाद शिक्षा महानिदेशक दीप्ति सिंह ने सक्रियता दिखाई है:
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जांच के आदेश: महानिदेशक ने मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) नैनीताल और SCERT की निदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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बिंदु: विभाग यह पता लगाएगा कि प्रिंटिंग लागत, पेपर की गुणवत्ता या किन तकनीकी कारणों से कीमतें इतनी अधिक तय की गईं।
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