
देहरादून, 29 जून 2026: उत्तराखंड मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के लिए आगामी २ जुलाई २०२६ तक का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान और ‘येलो अलर्ट’ (Yellow Alert) जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में मानसून की सक्रियता के चलते कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। वहीं, राज्य के दोनों प्रमुख मैदानी जिलों (हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर) में मुख्य रूप से शुष्क मौसम के बीच तेज झोंकेदार हवाएं चलने, बादलों की गर्जना और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है।
दिन-प्रतिदिन के मौसम का विधिक व प्रशासनिक पूर्वानुमान
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सोमवार, 29 जून (आज): पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने के साथ ही बारिश के तेज से अति तेज दौर चलेंगे। इस दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में ४० किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है।
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मंगलवार, 30 जून: कुमाऊं मंडल के पिथौरागढ़, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश का विशेष अलर्ट है। शेष पहाड़ी जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ेंगी। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में ४० किमी/घंटे की गति से तेज हवाएं चलेंगी और बादल गरजेंगे।
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बुधवार, 1 जुलाई: जुलाई माह की शुरुआत भी पर्वतीय क्षेत्रों में भारी वर्षा से होगी। नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और देहरादून जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है। मैदानी जिलों में केवल बादलों की गर्जना और बिजली चमकने की घटनाएं होंगी।
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गुरुवार, 2 जुलाई: इस दिन नैनीताल, बागेश्वर, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और चमोली जनपदों में कहीं-कहीं भारी बारिश का अनुमान है। बाकी पर्वतीय जिलों में तीव्र दौर की बारिश होगी, जबकि हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में बारिश के आसार नहीं हैं।
संभावित खतरे और नुकसान को लेकर मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले चार दिनों के खराब मौसम को देखते हुए शासन-प्रशासन और आम नागरिकों के लिए विशेष विधिक व व्यावहारिक सतर्कता एडवाइजरी जारी की है:
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भूस्खलन व चट्टान गिरना: ३० जून से २ जुलाई के मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम स्तर का भूस्खलन (Landslide) होने और पहाड़ी कगारों से चट्टानें गिरने की आशंका है। इसके चलते राष्ट्रीय राजमार्गों और लिंक रोड्स में अवरोध पैदा हो सकता है।
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नदी-नालों का बढ़ा प्रवाह: मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी गदेरों और नदी-नालों का जलस्तर अचानक अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव (Waterlogging) की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
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आकाशीय बिजली व तेज हवाएं: बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे आश्रय न लेने की हिदायत दी गई है। साथ ही, ४० किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली झोंकेदार हवाओं के कारण कच्चे व असुरक्षित मकानों, होर्डिंग्स और टिन शेड को आंशिक नुकसान पहुंच सकता है।
यात्रियों और पर्यटकों से प्रशासनिक अपील
मौसम विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चारधाम यात्रा तथा पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा पर निकल रहे श्रद्धालुओं व पर्यटकों से विशेष अपील की है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम के नवीनतम अपडेट की विधिक जानकारी अवश्य ले लें। संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतें और किसी भी आपातकालीन स्थिति में स्थानीय प्रशासन व आपदा कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क स्थापित करें।
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