देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र में ‘आवाज़ सुनो पहाड़ों की’ फिल्म फेस्टिवल के दूसरे सीजन का भव्य उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने ‘श्रद्धा सम्मान पुस्तिका’ का विमोचन किया और प्रेक्षागृह (Auditorium) के सौंदर्यीकरण की महत्वपूर्ण घोषणा भी की।
💰 फिल्म नीति 2026: सब्सिडी का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की नई फिल्म नीति के तहत स्थानीय और राष्ट्रीय फिल्मकारों को भारी वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है:
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स्थानीय भाषाएं: कुमाऊंनी, गढ़वाली और जौनसारी फिल्मों के लिए ₹2 करोड़ तक की सब्सिडी।
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हिंदी व अन्य भाषाएं: हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के निर्माण पर ₹3 करोड़ तक की सब्सिडी का प्रावधान।
🚀 फिल्मकारों के लिए ‘ईज ऑफ शूटिंग’
उत्तराखंड को फिल्म फ्रेंडली राज्य बनाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
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शून्य शूटिंग शुल्क: देवभूमि के रमणीक स्थलों पर शूटिंग के लिए अब कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
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सिंगल विंडो सिस्टम: फिल्म निर्माण की सभी अनुमतियों के लिए ऑनलाइन और एकल खिड़की व्यवस्था लागू की गई है।
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अपना OTT प्लेटफॉर्म: उत्तराखंड का अपना ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘वीडियोज़ अलार्म’ (Videos Alarm) अब 18 से अधिक देशों में अपनी पहुंच बना चुका है, जो स्थानीय कला को वैश्विक मंच दे रहा है।
🏗️ भविष्य की योजनाएं: फिल्म सिटी और रोजगार
मुख्यमंत्री धामी ने देवभूमि के युवाओं के लिए भविष्य का विजन साझा करते हुए कहा:
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इंफ्रास्ट्रक्चर: जल्द ही उत्तराखंड में आधुनिक फिल्म सिटी, हाई-टेक स्टूडियो और फिल्म संस्थानों का विकास किया जाएगा।
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रोजगार: इन परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को मनोरंजन जगत में बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।
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सांस्कृतिक पहचान: फिल्म फेस्टिवल जैसे आयोजनों से प्रदेश की खान-पान, लोक-संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता का प्रचार दुनिया भर में होगा।
मुख्यमंत्री का मुख्य संदेश
“यह फिल्म फेस्टिवल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी लोक-संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान देने का माध्यम है। हम उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के लिए दुनिया का सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाना चाहते हैं।”
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