देहरादून: उत्तराखंड की बर्फीली और शुद्ध जलधाराओं में पलने वाली ट्राउट (Trout) मछली अब सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बनाने जा रही है। राज्य सरकार ने प्रथम चरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 20 टन ट्राउट निर्यात करने का लक्ष्य रखा है। इस पहल से न केवल राज्य के मत्स्य पालकों की आय बढ़ेगी, बल्कि उत्तराखंड एक ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के रूप में भी उभरेगा।
🇦🇪 दुबई के ‘गल्फूड’ में मिली बड़ी कामयाबी
मत्स्य पालन विभाग ने हाल ही में दुबई में आयोजित ‘गल्फूड’ प्रदर्शनी में उत्तराखंडी ट्राउट का प्रदर्शन किया था:
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भारी मांग: यूएई के कई वितरकों ने मछली के स्वाद और गुणवत्ता को देखते हुए बड़े ऑर्डर देने की इच्छा जताई है।
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प्रमाणन की प्रक्रिया: निर्यात के लिए अनिवार्य खाद्य सुरक्षा (Food Safety) और अन्य जरूरी सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए विभाग ने कवायद तेज कर दी है।
🏔️ पहाड़ों में ट्राउट उत्पादन का बढ़ता जाल
शुद्ध और बहते पानी (रेसवेज) में पलने वाली यह मछली वर्तमान में राज्य के कई जिलों में मुख्य रोजगार का जरिया बन रही है:
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प्रमुख जिले: उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पिथौरागढ़, बागेश्वर और देहरादून के पर्वतीय क्षेत्र।
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विस्तार: अब चंपावत और नैनीताल में भी इसकी शुरुआत की जा रही है।
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उत्पादन क्षमता: वर्तमान में 1,625 रेसवेज के माध्यम से 710 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन हो रहा है।
🪖 सेना और आईटीबीपी के साथ मजबूत होता बाजार
निर्यात के साथ-साथ मत्स्य पालन विभाग घरेलू विपणन (Marketing) पर भी फोकस कर रहा है:
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ITBP: अब तक समितियों के माध्यम से आईटीबीपी को 32 टन मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।
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अगला कदम: सशस्त्र सीमा बल (SSB) और भारतीय सेना के साथ भी जल्द ही आपूर्ति का करार (MOU) होने वाला है।
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लग्जरी मार्केट: राज्य के बड़े सितारा होटलों में भी स्थानीय ट्राउट की मांग तेजी से बढ़ी है।
🎙️ मत्स्य पालन मंत्री का विजन
“हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द सभी प्रमाणपत्र प्राप्त कर यूएई को ट्राउट की पहली खेप भेजी जाए। इसके बाद अन्य देशों के लिए भी निर्यात के रास्ते खोले जाएंगे।”
— सौरभ बहुगुणा, मत्स्य पालन मंत्री, उत्तराखंड
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