
राजू अनेजा,लालकुआं/बिंदुखत्ता।एक बिजली के पोल की मांग ने इस वक्त विधायक के पेज में ही नहीं बल्कि पूरी लालकुआं विधानसभा की सियासत में करंट दौड़ा दिया है। बिंदुखत्ता की एक महिला द्वारा सोशल मीडिया पर की गई तीखी टिप्पणी के बाद विधायक के आधिकारिक पेज पर ऐसी बहस छिड़ गई है कि मामला अब आम शिकायत से आगे बढ़कर राजनीतिक जवाबदेही का विषय बन चुका है।
सोशल मीडिया पर सीधा वार
खुद को बिंदुखत्ता निवासी बताने वाली महिला ने विधायक मोहन सिंह बिष्ट के पेज पर टिप्पणी करते हुए लिखा —
“राजस्व गांव तो हम लड़कर ले लेंगे, एक बिजली का पोल ही लगा दो।”
महिला का आरोप है कि उनके क्षेत्र की एक गली में वर्षों से बिजली का पोल नहीं लगा है। जबकि वहां छह परिवार निवास करते हैं, पास में एक सरकारी विद्यालय और धार्मिक स्थल भी है। चुनाव के दौरान वादों की भरमार रही, लेकिन जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
400-500 मीटर दूर से खिंची केबल
महिला ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि गली में पोल न होने के कारण ग्रामीणों ने 400 से 500 मीटर दूर खेतों से लंबी केबल खींचकर अस्थायी बिजली कनेक्शन ले रखा है। खुले में लटकती ये तारें किसी भी समय हादसे को न्योता दे सकती हैं। सवाल यह है कि क्या विभाग और जनप्रतिनिधि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?
राजस्व गांव बनाम जमीनी सच्चाई
विधायक की ओर से कथित तौर पर यह तर्क दिया गया कि बजट की कमी से आपका पर्सनली काम नहीं हो पाया तो उसे सोशल मीडिया में लिखेंगे? रही बात सार्वजनिक कार्यों की सबसे बड़ा काम कर रहा हूं मैं आपके क्षेत्र राजस्व गांव बनाने। इस पर महिला ने पलटवार करते हुए कहा कि “राजस्व गांव तो जनता अपने हक की लड़ाई लड़कर बना ही लेगी, लेकिन गली में एक पोल लगवाना क्या इतना मुश्किल है?”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और देखते ही देखते समर्थक व विरोधी आमने-सामने आ गए।
बढ़ी सियासी तल्खी
इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। विपक्षी खेमे इसे विकास कार्यों की धीमी रफ्तार का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थक बजट और प्रक्रियात्मक अड़चनों का हवाला दे रहे हैं।
अब निगाहें प्रशासन पर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि समस्या वास्तविक है तो उसका समाधान कब तक होगा? क्या बिजली विभाग मौके का निरीक्षण करेगा? क्या गली में पोल लगने की प्रक्रिया शुरू होगी?
फिलहाल विधायक पक्ष की ओर से आधिकारिक विस्तृत बयान सामने आना बाकी है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
एक पोल की मांग ने यह जरूर साबित कर दिया है कि अब जनता सोशल मीडिया पर सीधे सवाल पूछ रही है — और जवाब भी उसी मंच पर चाहती है।