
राजू अनेजा,काशीपुर। प्रदेश के सबसे बड़े महानगर काशीपुर में गणतंत्र दिवस जैसे पावन राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगे के सम्मान को लेकर जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने पूरे तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका मिला, तो कहीं प्रमुख स्थानों से तिरंगा ही नदारद दिखाई दिया।
यह लापरवाही मात्र एक भूल नहीं, बल्कि उन वीर शहीदों और क्रांतिकारियों के बलिदान का अपमान है, जिन्होंने देश को आज़ादी दिलाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
शहर के प्रमुख चौराहे एम पी चौक पर लहराता तिरंगा जहां दूर से ही देशभक्ति की भावना जगाता था वो आज अपनी धुरी से गायब था।
वहीं जल संस्थान कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज का आधा झुका होना प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी की शर्मनाक मिसाल बन गया। सवाल यह है कि क्या राष्ट्रीय पर्व पर भी जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी इतनी ढीली हो चुकी है कि तिरंगे के सम्मान की भी परवाह नहीं रही?
राष्ट्रीय ध्वज संहिता स्पष्ट निर्देश देती है कि गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर तिरंगे का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। बावजूद इसके, काशीपुर में सामने आई यह स्थिति न केवल प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी अपने दायित्वों से कितने बेपरवाह हो चुके हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि तिरंगे के इस अपमान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
और क्या दोषी अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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