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जब सीएम धामी की हाजिरजवाबी ने जीता विपक्ष का दिल; एनडी तिवारी का शेर पढ़ बोले— “मेरा कद भी कुछ कम नहीं”

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भराड़ीसैंण (14 मार्च 2026): उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में उस वक्त ठहाके गूंज उठे जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी लंबाई पर विपक्ष की चुटकी का जवाब पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के अंदाज में दिया।

1. “मेरी लंबाई ज्यादा है तो क्या करूं”

वाकया दोपहर सवा 12 बजे का है, जब सीएम धामी ‘गुड गवर्नेंस’ पर सरकार की उपलब्धियां रखने खड़े हुए।

  • विपक्ष की मांग: जैसे ही सीएम ने बोलना शुरू किया, विपक्ष की ओर से आवाज आई— “थोड़ा तेज बोलिए, आवाज नहीं आ रही है।”

  • सीएम का पलटवार: माइक की ऊंचाई कम होने पर सीएम मुस्कुराते हुए बोले— “मेरी लंबाई ज्यादा है तो क्या करूं।” इस पर स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने भी चुटकी लेते हुए कहा— “अब माइक लंबे करने पड़ेंगे।”

2. एनडी तिवारी की पंक्तियों से विपक्ष निरुत्तर

कांग्रेस विधायकों की लगातार टिप्पणियों के बीच सीएम धामी ने स्वर्गीय एनडी तिवारी का एक मशहूर शेर पढ़कर माहौल को खुशनुमा बना दिया:

“यूं तो यहां आने वाला हर शख्स मेरे से बड़ा है, लेकिन मेरा कद भी कुछ कम नहीं…”

इस शायराना जवाब को सुनकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, काजी निजामुद्दीन और भुवन कापड़ी समेत तमाम विपक्षी विधायक अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

3. ‘गुड गवर्नेंस’ और वित्तीय प्रबंधन में उत्तराखंड का डंका

हल्के-फुल्के माहौल के बाद मुख्यमंत्री ने सदन के पटल पर राज्य की आर्थिक तरक्की का ब्योरा रखा:

  • नीति आयोग की रिपोर्ट: मार्च 2026 में जारी ‘राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक’ (FHI) में उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों की श्रेणी में दूसरा स्थान मिला है।

  • अरुण जेटली रिपोर्ट: वित्तीय प्रबंधन के मामले में विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड, अरुणाचल के बाद दूसरे पायदान पर है।

  • वित्तीय अनुशासन: सीएम ने बताया कि राज्य ने PRBM (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम) के मानकों का कड़ाई से पालन किया है और राजस्व अधिशेष (Revenue Surplus) की स्थिति बनाए रखी है।


Snapshot: उत्तराखंड की वित्तीय उपलब्धियां (FHI 2026)

सूचकांक / रिपोर्ट उत्तराखंड की रैंकिंग श्रेणी
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (नीति आयोग) दूसरा स्थान उत्तरपूर्वी हिमालयी राज्य
फाइनेंशियल मैनेजमेंट रिपोर्ट दूसरा स्थान विशेष दर्जा प्राप्त हिमालयी राज्य
राजकोषीय घाटा (Deficit) निर्धारित सीमा के भीतर GSDP के मानकों के अनुसार

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री धामी का यह अंदाज न केवल उनके व्यक्तित्व की सहजता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि लोकतंत्र में संवाद केवल आंकड़ों और बहसों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सम्मान और हास्य की भी जगह है। गुड गवर्नेंस के दावों के बीच सीएम ने यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ-साथ ‘सभ्य संवाद’ में भी विश्वास रखती है।

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