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मोबाइल छीना तो किसी ने काटी नस, कोई घर से भागा; हल्द्वानी में किशोरों की मानसिक सेहत पर बड़ा संकट

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हल्द्वानी: कुमाऊं के सबसे बड़े चिकित्सालय डॉ. सुशीला तिवारी (STH) में इन दिनों ‘नोमोफोबिया’ (No Mobile Phone Phobia) के चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं। मोबाइल की लत बच्चों के दिमाग पर इस कदर हावी हो गई है कि वे स्मार्टफोन से दूर होने पर आत्मघाती कदम उठाने और घर छोड़ने तक को तैयार हैं।

वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. युवराज पंत के अनुसार, इंटरनेट मीडिया का आभासी संसार बच्चों को हिंसक और विद्रोही बना रहा है।


🛑 हैरान कर देने वाले 4 केस: जब सनक बनी जान की दुश्मन

केस स्टडी क्या हुई घटना? वजह
केस 1: छात्रा गोवा भागी नौवीं में फेल होने पर जब परिजनों ने मोबाइल छीना, तो छात्रा दो दोस्तों संग गोवा भाग गई। वे वहां होटल में काम कर रहे थे और बालिग होकर विदेश भागने की फिराक में थे। किताब में फोन छिपाकर रील देखने की लत।
केस 2: परीक्षा का बहिष्कार कालाढूंगी रोड के एक छात्र ने गेमिंग के लिए पिता के खाते से ₹50,000 उड़ा दिए। पिता ने फोन छीना तो उसने बोर्ड परीक्षा देने से मना कर दिया और खुद को कमरे में कैद कर लिया। 16-16 घंटे ऑनलाइन गेमिंग की लत।
केस 3: नस काटने का प्रयास गोरापड़ाव की हाईस्कूल की छात्रा से जब बोर्ड परीक्षा के कारण फोन लिया गया, तो उसने गुस्से में ब्लेड से अपने हाथों की नस काटने की कोशिश की। रील देखने की दीवानगी।
केस 4: जहर गटका पहाड़पानी के 11वीं के छात्र का फोन खराब होने पर जब परिजनों ने ठीक नहीं कराया, तो उसने कीटनाशक पी लिया। समय पर इलाज मिलने से जान बच सकी। घंटों वीडियो कॉल करने की लत।

⚠️ क्या है ‘नोमोफोबिया’ के लक्षण?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यदि आपके बच्चे में ये लक्षण दिख रहे हैं, तो सावधान हो जाएं:

  • मोबाइल न मिलने पर बेहद आक्रामक या हिंसक हो जाना।

  • परिवार और दोस्तों से कटकर अकेले कमरे में बंद रहना।

  • पढ़ाई, खेल और खान-पान की अनदेखी कर केवल डिजिटल दुनिया में रहना।

  • मोबाइल छीनने पर खुद को नुकसान पहुँचाने की धमकी देना।


💡 अभिभावकों के लिए विशेषज्ञ की सलाह

एसटीएच के वरिष्ठ मनोविज्ञानी डॉ. युवराज पंत ने अभिभावकों को इन सुझावों पर अमल करने को कहा है:

  1. निगरानी है जरूरी: बच्चों को फोन देने के बाद उनकी डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखें।

  2. संवाद बढ़ाएं: बच्चों से खुलकर बात करें ताकि वे अपनी बात वर्चुअल दुनिया के बजाय आपसे साझा करें।

  3. विकल्प दें: बच्चों को मोबाइल के बजाय बाहरी खेल (Outdoors) और किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें।

  4. बचपन में फोन से दूरी: शुरुआती उम्र में बच्चों को स्मार्टफोन देने से कतई बचें।


डॉक्टर की चेतावनी: मोबाइल की लत अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक विकार का रूप ले चुकी है। गाजियाबाद में तीन बहनों का बहुमंजिला इमारत से कूदना इसी बढ़ती सनक का भयावह परिणाम था।

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