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कुमाऊं में ‘सफेद सोना’: मुनस्यारी और चौकोड़ी में सीजन का पहला हिमपात, अल्मोड़ा नगर भी बर्फ से ढका

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पिथौरागढ़/अल्मोड़ा: उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में मौसम ने अपना अद्भुत रंग दिखाया है। शुक्रवार को पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा के कई इलाकों में सीजन की पहली बर्फबारी हुई, जिससे पूरी घाटी चांदी जैसी सफेद चादर में लिपट गई है। जहाँ एक ओर पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं, वहीं कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया है।

🏔️ पिथौरागढ़: मुनस्यारी और चौकोड़ी में भारी हिमपात

सीमांत जिले पिथौरागढ़ के ऊँचाई वाले इलाकों में जमकर बर्फबारी दर्ज की गई है:

  • पर्यटन स्थल: मुनस्यारी और चौकोड़ी में सीजन का पहला हिमपात हुआ। खलियाटॉप, धरमघर और धारचूला की चोटियों पर भारी बर्फ गिरी है।

  • चीन सीमा: आदि कैलाश, ओम पर्वत, गुंजी और कालापानी जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्र पूरी तरह बर्फ से ढक चुके हैं।

  • पर्यटक: भारी संख्या में सैलानी बर्फबारी का लुत्फ उठाने मुनस्यारी और चौकोड़ी पहुँच रहे हैं।


🏛️ प्रशासन अलर्ट: डीएम के सख्त निर्देश

खराब मौसम और भारी बर्फबारी को देखते हुए पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशिष भटगांई ने मोर्चा संभाल लिया है:

  1. स्वास्थ्य विभाग: सीएमओ को दवाइयां, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को अपडेट रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  2. सड़कें और रसद: बंद सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी तैनात की गई हैं। ऊँचाई वाले इलाकों में पर्याप्त खाद्यान्न स्टॉक रखने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं।

  3. हेल्पलाइन: आपात स्थिति के लिए प्रशासन ने टोल-फ्री नंबर 1077 जारी किया है।

  4. अन्य सेवाएं: बिजली और संचार विभाग को अलर्ट पर रखा गया है ताकि नेटवर्क और सप्लाई बाधित न हो।


🌨️ अल्मोड़ा: दोपहर बाद बदला मौसम का मिजाज

अल्मोड़ा जिले में भी शुक्रवार को प्रकृति ने सफेद चादर ओढ़ ली:

  • नगर क्षेत्र: अल्मोड़ा शहर में दोपहर बाद बर्फबारी शुरू हुई, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई।

  • प्रमुख स्थल: जागेश्वर धाम, बिनसर वन्यजीव अभयारण्य, कसार देवी, मोरनौला और स्याही देवी में भारी बर्फबारी हुई।

  • देर शाम तक असर: शाम होते-होते रानीखेत के चौबटिया, द्वाराहाट के दूनागिरि-पांडवखोली और लमगड़ा के शहरफाटक क्षेत्र भी बर्फ से सराबोर हो गए।


📉 जनजीवन पर प्रभाव

बर्फबारी के बाद चली बर्फीली हवाओं (शीतलहर) ने पूरे कुमाऊं मंडल को ठिठुरा दिया है। कड़ाके की ठंड के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। हालांकि, किसान इस बर्फबारी को फसलों (विशेषकर सेब और रबी की फसल) के लिए बेहद फायदेमंद मान रहे हैं।

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