हिमालय प्रहरी

अमित बिष्ट बनकर किराए पर क्यों रह रहे थे अजीम मिया ? क्या हे असली नाम के पीछे की कहानी पुलिस जांच में जुटी

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आधार कार्ड की जांच हुई तो खुली पहचान की परत, बिंदुखत्ता में मचा हड़कंप

 

ग्रामीणों ने युवक को पकड़कर पुलिस को सौंपा, कोतवाली पहुंचे दर्जनों महिला-पुरुष

 

तहरीर नहीं मिलने पर पुलिस ने पुलिस एक्ट में किया चालान, पहचान बदलकर रहने के मकसद पर उठे सवाल

 

राजू अनेजा, लालकुआं। यहां ‘अमित बिष्ट’ नाम से रह रहे एक युवक की पहचान को लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े कर दिए। ग्रामीणों का दावा है कि युवक की वास्तविक पहचान कुछ और है और वह कथित तौर पर हिंदू नाम बताकर यहां रह रहा था। मामला सामने आते ही ग्रामीणों ने युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

बताया गया कि टेंट चौराहा, बिंदुखत्ता निवासी एक परिवार के यहां रुद्रपुर का एक युवक रह रहा था। ग्रामीणों को मंगलवार को उसके मुस्लिम होने की जानकारी मिली। इसके बाद कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे और युवक से पूछताछ की। युवक ने अपना नाम अमित बिष्ट बताया।

मामला यहीं नहीं रुका। ग्रामीणों ने युवक की पहचान को लेकर उसके दस्तावेजों की जांच की। दावा है कि आधार कार्ड में उसका नाम अजीम खान पुत्र नन्हे खान, निवासी रुद्रपुर दर्ज था। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को हिरासत में लेकर कोतवाली ले गई।

 

नाम अमित बिष्ट, दस्तावेज में अजीम खान—आखिर वजह क्या थी?

युवक की पहचान को लेकर सामने आई इस स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि युवक वास्तव में अजीम खान है तो वह कथित तौर पर अमित बिष्ट के नाम से वहां क्यों रह रहा था? क्या उसने मकान मालिक को अपनी वास्तविक पहचान बताई थी? यदि नहीं, तो ऐसा करने के पीछे उसका मकसद क्या था?

हालांकि इन सवालों के जवाब अभी पुलिस जांच में सामने आना बाकी हैं। सिर्फ नाम और पहचान में अंतर सामने आने से किसी आपराधिक मंशा का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

 

कोतवाली पहुंचे दर्जनों महिला-पुरुष, कार्रवाई की मांग

मामले की जानकारी फैलते ही दर्जनों महिला-पुरुष और हिंदूवादी कार्यकर्ता कोतवाली पहुंच गए। उन्होंने युवक के साथ-साथ उसे घर में रखने वाले परिवार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान मामला काफी गरमा गया। बताया गया कि परिवार ने ग्रामीणों से माफी मांगते हुए भविष्य में उक्त युवक से किसी तरह का संबंध नहीं रखने का भरोसा दिया।

 

तहरीर नहीं मिली तो पुलिस एक्ट में चालान

पुलिस के अनुसार मामले में किसी पक्ष की ओर से कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई। इसके चलते पुलिस ने युवक के खिलाफ उपलब्ध परिस्थितियों के आधार पर पुलिस एक्ट के तहत चालानी कार्रवाई की।

फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि ‘अमित बिष्ट’ नाम से रहने की जरूरत युवक को क्यों पड़ी और उसने मकान मालिक को अपनी वास्तविक पहचान क्या बताई थी? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के बयानों से ही साफ हो सकेगा।

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