
बुधवार को काशीपुर बाईपास स्थित सिटी क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में भुल्लर ने भाजपा विधायक अरविंद पांडेय पर गरीबों की जमीन बिना खतौनी के हड़पने का आरोप जड़ते हुए कहा कि “ऐसे लोगों की जगह सलाखों के पीछे है।” उन्होंने भाजपा और पांडेय की छवि को “भू-माफिया” करार देते हुए कहा कि इन्हें बेनकाब करना जरूरी है।
भुल्लर ने आरोप लगाया कि पांडेय ने जमीन हड़पने की पटकथा वर्षों पहले लिख ली थी। शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र में शिक्षा सुविधाओं के विकास की अनदेखी की, लेकिन जमीनों का जाल जरूर बिछाया। इतना ही नहीं, उन्होंने पांडेय के बेटे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जमीन खरीद के दस्तावेजों में उम्र 42 वर्ष दर्शाई गई, जबकि वास्तविक उम्र इससे कम है।
भुल्लर ने यह भी याद दिलाया कि पांडेय ने कथित तौर पर एक महिला की जमीन लौटाने की बात कही थी। “अगर कहा था तो अब उस पर कायम भी रहें,” उन्होंने तंज कसते हुए कहा।
यहीं नहीं रुके भुल्लर। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विधायक ने घर पहुंचकर मुद्दे को भटकाने की कोशिश की। तीखे शब्दों में उन्होंने चेतावनी दी—“अगली बार घर आएं तो बताकर आएं, सेवा पूरी की जाएगी।”
भुल्लर ने प्रशासन से मांग की कि सभी जमीन सौदों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए।
अब सवाल यही है—क्या यह जनहित की लड़ाई है या सियासी समीकरणों का खेल? पहली प्रेस की गलबहियां और दूसरी की तल्खी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।