चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की मौतों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. इसको लेकर उत्तराखंड की स्वास्थ्य निदेशक डॉ शैलजा भट्ट ने बयान जारी कर कहा कि 3 मई से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा में अब तक 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. जिसमें मौतो का कारण या तो हाई ब्लड प्रेशर है या फिर कार्डियक अरेस्ट है.
तीर्थयात्रियों की मौत को लेकर बुधवार को पीएमओ कार्यालय ने भी राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि है चारधाम यात्रा में तीर्थयात्री, स्वास्थ्य परीक्षण करा के ही आयें साथ ही हृदय रोग वाले तीर्थयात्री पूरी सावधानी के साथ यात्रा करें.
उत्तराखंड में जिस तरह चारधाम यात्रा के दौरान मौतों का सिलसिला तेज हुआ है. उसको लेकर भारत सरकार ने भी राज्य से रिपोर्ट मांगी है. स्थिति यह है कि अब तक 29 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है. मरने वालों में 30 साल के युवाओं से लेकर 75 साल तक के बुजुर्ग तक शामिल है. जानकारी के अनुसार, केदारनाथ में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है.
आंकड़ों पर गौर करें तो 30 से 40 साल उम्र के 3 श्रद्धालुओं की जान गई है. इसी तरह 40 से अधिक और 50 तक की उम्र वाले 4 श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई है. 50 से 60 साल तक की उम्र वाले 8 श्रद्धालुओं की जान गई है. जबकि 76 साल तक के 13 मरीजों की जान गई है. सबसे ज्यादा मौतें यमुनोत्री पैदल मार्ग और केदारनाथ में हो चुकी है.
क्या बोले डीजी हेल्थ? उत्तराखंड के स्वास्थ्य महानिदेशक शैलजा भट्ट का कहना है कि किसी भी श्रद्धालुओं की अस्पताल में मृत्यु नहीं हुई है. सभी की मौत यात्रा मार्गों पर हुई है. डीजी हेल्थ स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही मानने को तैयार तक नहीं है. जबकि, हालात ये हैं कि यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य व्यवस्था ही खराब है. यात्रियों को आपातकालीन स्थिति के लिए डॉक्टर तक नहीं है. खुद मुख्य सचिव कह चुके हैं कि उत्तराखंड के पास हृदय रोग विशेषज्ञों की कमी है. ऐसे में अब डीजी हेल्थ का यह बयान बहुत ही बेतुका है.
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