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हरिद्वार: निर्जला एकादशी पर गंगा घाटों पर उमड़ी आस्था की भीड़; अधिकमास के कारण एक महीने की देरी से आया स्नान पर्व

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हरिद्वार, 25 जून 2026: सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखने वाले ‘निर्जला एकादशी’ स्नान पर्व के सुअवसर पर आज तीर्थ नगरी हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध हरकी पैड़ी सहित विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। इस वर्ष ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार हिंदू पंचांग में ‘अधिमास’ (अधिक मास) होने के कारण निर्जला एकादशी अपने पारंपरिक समय से लगभग एक माह के विलंब से आई है, जिससे गंगा स्नान को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।

गंगा दशहरा के ठीक एक महीने बाद संयोग; देश भर से पहुंचे श्रद्धालु

विगत वर्षों की सामान्य विधिक व सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार निर्जला एकादशी का पर्व गंगा दशहरा के ठीक अगले दिन पड़ता है। परंतु इस वर्ष खगोलीय और पंचांगीय विशिष्टता के कारण दोनों महापर्वों के बीच एक महीने का लंबा अंतराल रहा:

  • गंगा दशहरा: इस वर्ष २५ मई २०२६ को मनाया गया था।

  • निर्जला एकादशी: आज २५ जून २०२६ को पूरे विधि-विधान के साथ मनाई जा रही है।

सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी के ब्रह्मकुंड पर विशेष विधिक पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख, समृद्धि, दीर्घायु तथा वैश्विक कल्याण की कामना की।

दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला; पुलिस की सुरक्षा चाक-चौबंद

धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी को वर्ष भर में आने वाली सभी २४ एकादशियों में सबसे कठिन और सर्वाधिक पुण्य प्रदान करने वाली विधिक तिथि माना जाता है। इस दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखने और गंगा स्नान के बाद जल से भरे कलश, पंखे, छतरी और मौसमी फलों का दान करने का विशेष विधिक महत्व है, जिसके चलते घाटों पर दान-पुण्य का तांता लगा रहा।

स्नान पर्व को शांतिपूर्वक और सकुशल संपन्न कराने के लिए हरिद्वार जिला व मेला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया:

“वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशन में पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित कर भारी पुलिस बल, जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती की गई है। हरकी पैड़ी और आस-पास के संवेदनशील घाटों की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक सीसीटीवी (CCTV) कैमरों और केंद्रीय कंट्रोल रूम के माध्यम से पल-पल की पारदर्शी निगरानी (Surveillance) की जा रही है।”

दोपहर तक लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान कर अपने गंतव्य को लौट चुके थे, जबकि घाटों पर आगामी आरती के समय तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला निरंतर जारी है।

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