
इकलौते बेटे को खोने के असहनीय दर्द के बीच माता-पिता ने लिया मानवता का सबसे बड़ा फैसला,नेत्रदान से दो बच्चों की आंखों में लौटेगी रोशनी
राजू अनेजा,गदरपुर। कहते हैं कि इंसान की असली पहचान उसके जाने के बाद भी उसके किए गए नेक कामों से होती है। महज 11 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहने वाले शिवांश ढींगरा ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया। भले ही वह अब अपने माता-पिता के बीच नहीं है, लेकिन उसकी आंखों की रोशनी अब दो मासूम बच्चों के जीवन में उजाला बिखेरेगी। यह घटना हर किसी की आंखें नम कर देने वाली है।
गदरपुर क्षेत्र के ग्राम गोपाल नगर निवासी गुलशन ढींगरा के इकलौते पुत्र शिवांश ढींगरा का अचानक हृदय गति रुकने से निधन हो गया। इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में चीख-पुकार और मातम का माहौल था। जिस बेटे को मां-बाप ने बड़े प्यार से पाला था, उसकी अंतिम विदाई का समय किसी भी माता-पिता के लिए सबसे कठिन क्षण होता है।
लेकिन इसी असहनीय पीड़ा के बीच शिवांश के माता-पिता ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने पूरे समाज को भावुक कर दिया। उन्होंने अपने बेटे के नेत्रदान की सहमति देकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। उनके इस निर्णय से अब दो जरूरतमंद बच्चों की आंखों में रोशनी लौट सकेगी। शिवांश भले ही इस दुनिया से चला गया, लेकिन उसकी आंखें किसी और के सपनों को देखने का माध्यम बनेंगी।
परिजनों का कहना है कि यदि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, तो कम से कम उसकी आंखों के जरिए दो बच्चों के जीवन में उजाला बना रहे। यही सोच उनके लिए इस दुख की घड़ी में सबसे बड़ा संबल बनी। डॉक्टरों की टीम ने समय रहते नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में इतनी कम उम्र के बच्चे के निधन के बाद नेत्रदान के मामले बेहद दुर्लभ हैं। यही वजह है कि शिवांश और उसके परिवार का यह निर्णय पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गया है। चिकित्सकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस पहल को मानवता की अनूठी मिसाल बताया है।
दिवंगत शिवांश को श्रद्धांजलि देने के लिए क्षेत्र के अनेक सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि परिवार के घर पहुंचे। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल, सोचो डिफ्रेंट, पंजाबी सभा, जय भवानी जागरण मंडल, सनातन धर्म मंदिर समिति, श्री गुरु रामदास संस्था, श्री श्याम मंडल, जियो जिंदगी, गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, नगर पालिका परिषद सहित कई सामाजिक संगठनों ने परिवार के साहस को नमन करते हुए कहा कि शिवांश अब केवल एक परिवार का बेटा नहीं, बल्कि मानवता की प्रेरणा बन गया है।
शिवांश की सांसें भले थम गईं, लेकिन उसकी आंखों की रोशनी अब दो बच्चों की जिंदगी में नई सुबह लेकर आएगी। यही उसके जीवन की सबसे बड़ी विरासत और उसके माता-पिता की सबसे महान श्रद्धांजलि है।