
हमले के बाद पुलिस ने बिना किसी जल्दबाजी के हर संभावित एंगल पर काम शुरू किया। लूट, राजनीतिक रंजिश और व्यक्तिगत दुश्मनी—हर पहलू की जांच हुई। लेकिन तकनीकी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शक की सुई खुद कथित पीड़ित पर टिकती चली गई।
घर में तय हुई पटकथा, बाहर किया गया अंजाम
पुलिस के अनुसार, एलायंस कॉलोनी स्थित आवास पर बैठकर सौरभ ने अपने परिचित इंदर नारंग के साथ हमले की पूरी योजना बनाई। बातचीत इतनी गोपनीय रखी गई कि घर के अन्य परिजनों को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में उसी योजना के तहत बाहर हमले को अंजाम दिलाया गया।
500 कैमरे, 15 हजार नंबर और टूटा झूठ
तीन विशेष टीमों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। वहीं, 15 हजार से ज्यादा मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लेकर कॉल पैटर्न और लोकेशन का विश्लेषण किया गया। इन्हीं तकनीकी सबूतों ने साजिश की एक-एक परत उधेड़ दी।
हमलावर और साजिशकर्ता का कोई आमना-सामना नहीं
जांच में सामने आया कि सौरभ और हमलावर एक-दूसरे को पहचानते तक नहीं थे। तय समय पर संपर्क न हो पाने के कारण दोनों पक्ष अलग-अलग जगह भटकते रहे और कई बार सीसीटीवी कैमरों में कैद भी हुए। बाद में फोन कॉल के जरिए सही लोकेशन साझा की गई।
पुलिस को भटकाने की कोशिश, लेकिन तीसरी आंख भारी
वारदात के बाद हमलावरों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए आवास विकास और मुख्य बाजार में कई चक्कर लगाए, लेकिन सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड के आगे यह चाल नाकाम साबित हुई।
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