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एडीजी लॉ एंड ऑर्डर का AI जनरेटेड फर्जी डांस वीडियो वायरल; उत्तराखंड पुलिस के नाम पर बनाया फेक इंस्टाग्राम अकाउंट, जांच में जुटी साइबर सेल

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देहरादून, 21 जून 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ कुछ शातिर शरारती तत्वों ने उत्तराखंड पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) कानून एवं व्यवस्था का ‘एआई जनरेटेड’ फर्जी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। आरोपियों ने न केवल भ्रामक वीडियो बनाया, बल्कि इंस्टाग्राम पर उत्तराखंड पुलिस के नाम से एक फर्जी (फेक) अकाउंट भी तैयार किया था। इस कूटरचित वीडियो में पुलिस अधिकारी को डांस करते हुए दिखाया गया है, जिसे खाकी की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी विधिक साजिश माना जा रहा है। मामले का संज्ञान लेते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान प्रभारी ने पकड़ा फर्जीवाड़ा

यह पूरी विधिक कार्रवाई साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन की सोशल मीडिया प्रभारी भावना कर्णवाल की लिखित तहरीर के आधार पर की गई है।

  • ऐसे खुला मामला: प्रभारी भावना कर्णवाल अपनी टीम के साथ रूटीन सोशल मीडिया निगरानी (Cyber Patrol) पर थीं। इसी दौरान उन्हें इंस्टाग्राम पर उत्तराखंड पुलिस के नाम से बने एक अनधिकृत अकाउंट पर यह वीडियो मिला।

  • एआई तकनीक का खेल: तकनीकी टीम द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि यह वीडियो असली नहीं है, बल्कि डीपफेक या एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर तैयार किया गया है। भ्रामक और फर्जी वीडियो प्रसारित करने का सीधा उद्देश्य पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा को सार्वजनिक रूप से ठेस पहुंचाना है।

डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही पुलिस; आईटी एक्ट में कार्रवाई

इस गंभीर साइबर अपराध पर उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि यह कृत्य सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और सोशल मीडिया नियमों का खुला विधिक उल्लंघन है। इस प्रकार की फर्जी गतिविधियों से न केवल समाज में भ्रामक सूचनाएं फैलती हैं, बल्कि सरकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली और उनकी विधिक साख पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

साइबर सेल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उक्त फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट, उससे लिंक मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, आईपी एड्रेस (IP Address) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को कब्जे में लेकर विधिक तकनीकी पड़ताल शुरू कर दी है।

एसएसपी एसटीएफ की चेतावनी: डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश से रहें सावधान

इस प्रकरण के बीच एसएसपी-एसटीएफ (SSP-STF) अजय सिंह ने आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण साइबर एडवाइजरी व विधिक चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा:

“मौजूदा समय में साइबर ठग बेहद शातिर तरीके अपना रहे हैं। फर्जी निवेश योजनाएं, ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाना, और ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर लोगों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। किसी भी प्रकार के प्रलोभन या संदिग्ध कॉल पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ पर अपनी विधिक शिकायत दर्ज कराए।”

इसके साथ ही उन्होंने एक और महत्वपूर्ण व्यावहारिक विधिक सलाह दी कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना स्मार्टफोन सौंपने या बाजार में फोन रिपेयरिंग के लिए देने से पहले अत्यधिक सतर्कता बरतें, क्योंकि इससे डेटा चोरी होने का खतरा रहता है।

सावधान! फोन ठीक कराने दुकान पर गए युवक के खाते से उड़े लाखों रुपये

इसी बीच साइबर ठगी का एक और ताजा मामला देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र से सामने आया है। धर्मपुर निवासी मोहम्मद हनीफ ने थाने में विधिक शिकायत दर्ज कराई है कि बीती ३० मई को वह अपनी स्थानीय बाजार में एक दुकान पर अपना मोबाइल फोन ठीक करवाने गए थे।

फोन मैकेनिक को सौंपने के कुछ देर बाद ही उनके पास एक संदिग्ध कॉल आई। फोन करने वाले अज्ञात व्यक्ति ने उनके खाते से पैसे कटने की बात कही और अचानक कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। इसके तुरंत बाद हनीफ के बैंक खाते से क्रमशः ₹८०,००० और ₹७,५०० कट गए। यही नहीं, ठगों ने उनके क्रेडिट कार्ड का विधिक डेटा चुराकर उससे भी ₹१.५ लाख (डेढ़ लाख रुपये) पार कर दिए। पीड़ित की तहरीर पर नेहरू कॉलोनी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की विधिक जांच शुरू कर दी है।

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