अल्मोड़ा और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों के मरीजों के लिए यह एक बड़ी चिकित्सा उपलब्धि है। बेस अस्पताल (मेडिकल कॉलेज) में फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (PMR) विभाग का सक्रिय होना उन लोगों के लिए वरदान साबित होगा जो लंबे समय से पुराने दर्द या शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे थे।
यहाँ इस नई स्वास्थ्य सुविधा की मुख्य विशेषताएं और मरीजों को होने वाले लाभ दिए गए हैं:
अल्मोड़ा (15 अप्रैल 2026): मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर सीपी भैसोड़ा के अनुसार, फरवरी में शुरू हुए इस विभाग ने अब पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया है, जिससे मरीजों को हायर सेंटर (जैसे हल्द्वानी या दिल्ली) रेफर होने की मजबूरी से राहत मिली है।
1. किन बीमारियों का होगा इलाज?
PMR विभाग मुख्य रूप से उन समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करता है जो इंसान की चलने-फिरने या सामान्य कार्यों की क्षमता को प्रभावित करती हैं:
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ब्रेन स्ट्रोक (पक्षघात): स्ट्रोक के बाद शरीर के अंगों का सुन्न होना या काम न करना।
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तंत्रिका तंत्र (Neurological): नसों में खिंचाव, दबना या रीढ़ की हड्डी (Spine) से जुड़ी चोटें।
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हड्डियां और जोड़: गठिया, जोड़ों का पुराना दर्द, स्नायुबंधन (Ligaments) और मांसपेशियों की चोट।
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विकलांगता पुनर्वास: जन्मजात या दुर्घटना के कारण हुई शारीरिक अक्षमता में सुधार।
2. उपचार की आधुनिक ‘गैर-सर्जिकल’ तकनीक
इस विभाग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ ऑपरेशन (Surgery) के बिना मरीज को ठीक करने की कोशिश की जाती है:
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दर्द प्रबंधन (Pain Management): विशेष इंजेक्शन और आधुनिक दवाओं के जरिए पुराने से पुराने दर्द का इलाज।
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फिजियोथेरेपी: आधुनिक मशीनों और व्यायाम के जरिए अंगों की कार्यक्षमता वापस लाना।
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समग्र उपचार: दवाओं और चिकित्सीय तकनीकों का ऐसा मिश्रण जो मरीज की जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) में सुधार करे।
3. स्थानीय स्तर पर बड़ी राहत
अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी क्षेत्र में बुजुर्गों में घुटने, कमर दर्द और स्ट्रोक की समस्याएं आम हैं। पहले इन सुविधाओं के लिए मरीजों को मैदानी इलाकों के चक्कर काटने पड़ते थे, जो आर्थिक और शारीरिक रूप से कष्टदायक था। अब बेस अस्पताल में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में यह सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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