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बागेश्वर की बेटी प्रेमा रावत ने तय किया खेतों से ‘इंडिया-ए’ और डब्ल्यूपीएल तक का सफर; बनीं महिला क्रिकेट की नई पहचान

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बागेश्वर/कपकोट, 20 जून 2026: उत्तराखंड के कपकोट ब्लॉक स्थित सुदूर उच्च हिमालयी गांव सुमटी-बैसानी की पहाड़ियों और खेतों में भाइयों के साथ क्रिकेट खेलने वाली एक छोटी सी बच्ची आज भारतीय महिला क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा बन चुकी है। पहाड़ के सीमित संसाधनों और पड़ोसियों की डांट की परवाह न करते हुए प्रेमा रावत ने अपने सपनों को हकीकत में बदला है। आज उनके इस विधिक व खेल कौशल के दम पर न केवल बागेश्वर बल्कि पूरे उत्तराखंड का नाम राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर गर्व से चमका है।

खेतों से शुरू हुआ सफर; डांट और चुनौतियों के बीच नहीं कम हुआ जुनून

एक दौर था जब सुमटी-बैसानी गांव की अधिकांश लड़कियां पारंपरिक घरेलू कार्यों और गतिविधियों तक ही सीमित रहती थीं, लेकिन प्रेमा के हाथों में हमेशा बल्ला और गेंद सजी रहती थी।

  • पारिवारिक सहयोग: प्रेमा ने क्रिकेट के शुरुआती गुर अपने भाइयों हेमंत सिंह रावत और विमल रावत के साथ घर के आंगन और खेतों में खेलते हुए सीखे।

  • संघर्ष के दिन: खेल के दौरान कई बार गेंद दूसरों के खेतों में चली जाती थी, जिसके कारण उन्हें पड़ोसियों की डांट भी सुननी पड़ती थी, लेकिन खेल के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। वायुसेना (Air Force) में कार्यरत उनके पिता केदार सिंह रावत और माता बसंती देवी ने बेटी के भीतर छिपी इस विधिक खेल प्रतिभा को पहचाना और रूढ़ियों को दरकिनार कर हर कदम पर उसका साथ दिया।

बरेली एकेडमी से मिली धार; उत्तराखंड टीम में चयन से रचा इतिहास

प्रेमा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैतृक गांव से ही प्राप्त की थी, जिसके बाद उनका परिवार उत्तर प्रदेश के बरेली में शिफ्ट हो गया। बरेली में उन्होंने ‘बरेली क्रिकेट एकेडमी’ जॉइन कर अपनी लेग स्पिन (Leg-spin) गेंदबाजी को पेशेवर रूप से निखारा। हालांकि, उनका विधिक पंजीकरण ‘क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बागेश्वर’ में ही रहा।

  • 2021 में राज्य टीम में एंट्री: अपनी कड़ी मेहनत और शानदार स्पिन गेंदबाजी के दम पर वर्ष २०२१ में उनका चयन उत्तराखंड महिला क्रिकेट टीम में हुआ।

  • जिले का नाम किया रोशन: वह बागेश्वर जिले की उन शुरुआती पहली महिला क्रिकेटरों में शामिल हैं, जिन्होंने राज्य स्तर पर अपनी खेल क्षमता का लोहा मनवाया और सीनियर महिला टी-20 प्रतियोगिताओं में टीम की रीढ़ बनीं।

WPL और ‘इंडिया-ए’ टीम तक बनाई विधिक पहुंच

घरेलू क्रिकेट और उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) में बल्लेबाजों को अपनी फिरकी पर नचाने वाली प्रेमा का प्रदर्शन लगातार ग्राफ ऊंचा करता गया, जिसने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा:

  • महिला प्रीमियर लीग (WPL): प्रेमा के करियर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें विमेंस प्रीमियर लीग में खेलने का अवसर मिला, जहां उन्होंने दुनिया के दिग्गज क्रिकेटरों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया।

  • इंडिया-ए टीम में चयन: इसके बाद उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें ‘इंडिया-ए’ टीम में शामिल किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के विरुद्ध खेलते हुए प्रेमा का आत्मविश्वास और बढ़ा, जिसने अब सीनियर भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य विधिक दरवाजे उनके लिए खोल दिए हैं।

इस वर्ष पैतृक गांव सुमटी पहुंचीं प्रेमा; बच्चों को दिए सफलता के टिप्स

वर्तमान में उनका परिवार भले ही बरेली में निवास करता हो, लेकिन प्रेमा अपनी जड़ों को नहीं भूली हैं। इस वर्ष वह एक निजी कार्यक्रम के तहत अपने पैतृक गांव सुमटी आईं। उनके आगमन पर हाईस्कूल बैसानी में छात्र-छात्राओं और स्थानीय ग्रामीणों ने उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया। इस दौरान प्रेमा ने पहाड़ के नौनिहालों और उभरते खिलाड़ियों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों को खेल के गुर सिखाए और विधिक टिप्स देते हुए कहा कि प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती; यदि मन में सच्चा जुनून और संकल्प हो, तो पहाड़ के सुदूर गांवों से निकलकर भी दुनिया जीती जा सकती है।

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