
देहरादून। उत्तराखंड में बड़े उद्योगों को प्रोत्साहन देने, उनके विस्तार को गति प्रदान करने और नए निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश की ‘मेगा इंडस्ट्रियल नीति’ (Mega Industrial Policy) के अंतर्गत अनुपूरक बजट में 12 करोड़ रुपये का विशेष वित्तीय प्रविधान किया गया है। इस बजट आवंटन से लंबे समय से लंबित पड़े औद्योगिक अनुदान (सब्सिडी) का भुगतान किया जा सकेगा, जिससे राज्य में कार्यरत बड़े उद्योगों को सीधी आर्थिक राहत मिलने के साथ ही उत्पादन, पूंजी निवेश और रोजगार सृजन को नई ऊर्जा मिलेगी।
लंबित अनुदान चुकता होने से विस्तार योजनाओं को मिलेगी मजबूती
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेगा इंडस्ट्रियल नीति के तहत जारी यह बजट प्रदेश की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अनुदान का भुगतान होने से पात्र औद्योगिक इकाइयों को अपनी परिचालन गतिविधियों और विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ाने में सहूलियत होगी। इसके अलावा, नए उद्यमियों को राज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
प्रदेश में 146 वृहत इकाइयां; 31 हजार करोड़ से अधिक का निवेश
राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक उत्तराखंड में कुल 146 वृहत (बड़ी) औद्योगिक इकाइयां सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। इन उद्योगों के माध्यम से प्रदेश में अब तक 31,647.82 करोड़ रुपये का भारी-भरकम पूंजी निवेश आ चुका है, जबकि इनके जरिये प्रत्यक्ष रूप से 70,037 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।
ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार बने औद्योगिक हब
जनपदवार आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के मैदानी जिले औद्योगिक विकास में सबसे आगे हैं। राज्य में सर्वाधिक 77 बड़ी औद्योगिक इकाइयां अकेले ऊधमसिंह नगर जिले में स्थापित हैं। इसके बाद हरिद्वार 50 इकाइयों के साथ दूसरे और देहरादून 17 इकाइयों के साथ तीसरे स्थान पर है।
उत्तराखंड में वृहत उद्योगों की जिलावार स्थिति:
| जनपद | कार्यरत इकाइयां | पूंजी निवेश (करोड़ रुपये में) | सृजित रोजगार |
| हरिद्वार | 50 | ₹13,735.77 | 33,056 |
| ऊधमसिंह नगर | 77 | ₹13,191.42 | 28,011 |
| देहरादून | 17 | ₹334.10 | 4,101 |
| नैनीताल | 01 | ₹291.90 | 4,134 |
| पौड़ी गढ़वाल | 01 | ₹94.63 | 735 |
| कुल योग | 146 | ₹31,647.82 | 70,037 |
राज्य सरकार के इस बजटीय निर्णय से हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के औद्योगिक गलियारों (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स) के साथ-साथ पर्वतीय निकटवर्ती जनपदों में भी औद्योगिक गतिविधियों को बल मिलने की पूरी संभावना है।
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