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रुद्रपुर: कुमाऊं के पहले हाईटेक बस टर्मिनल निर्माण का रास्ता साफ; बाधक बन रहीं 48 दुकानों पर 27 जून को चलेगा बुलडोजर, आज मुनादी

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रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर), 24 जून 2026: ऊधम सिंह नगर जनपद के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में कुमाऊं के पहले अत्याधुनिक (हाईटेक) बस टर्मिनल के निर्माण की राह में आ रहे रोड़े अब पूरी तरह दूर होने जा रहे हैं। बस टर्मिनल के मुख्य विधिक भूखंड पर बाधक बन रहीं करीब ४८ व्यावसायिक दुकानों को ध्वस्त करने की अंतिम प्रशासनिक व विधिक तैयारी कर ली गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कड़ा संज्ञान लिए जाने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। प्रशासन ने स्पष्ट विधिक अल्टीमेटम दिया है कि यदि २७ जून २०२६ तक इन दुकानों को स्वेच्छा से खाली नहीं किया गया, तो सीधे बुलडोजर एक्शन (प्रवर्तन कार्रवाई) अमल में लाई जाएगी।

2021 से चल रहा था नोटिस का खेल; एडीएम ने दिए मुनादी व वीडियोग्राफी के निर्देश

प्राप्त आधिकारिक व विधिक जानकारी के अनुसार, इन चिन्हित ४८ अवैध दुकानदारों को वर्ष २०२१ से ही परिवहन निगम और जिला प्रशासन द्वारा बार-बार विधिक नोटिस दिए जा रहे थे। इसके बावजूद दुकानों को खाली नहीं किया जा सका, जिससे अनुबंधित कार्यदायी संस्था को धरातल पर काम शुरू करने में भारी व्यावहारिक व विधिक परेशानी हो रही थी।

इस गतिरोध पर कड़ा रुख अपनाते हुए अपर जिलाधिकारी (ADM) पंकज उपाध्याय ने मंगलवार को लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता (EE) को दूरभाष पर सीधे विधिक निर्देश जारी किए:

  • आज होगी मुनादी: बुधवार (आज) को किच्छा बाईपास साइड स्थित उक्त सभी दुकानों के सामने लाउडस्पीकर के माध्यम से विधिक रूप से हटने की अंतिम मुनादी (सार्वजनिक घोषणा) कराई जाए।

  • अनिवार्य वीडियोग्राफी: मुनादी की इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से पारदर्शी वीडियोग्राफी भी कराई जाए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विधिक विवाद से बचा जा सके।

  • हर्जाना वसूली: २७ जून २०२६ की निर्धारित समयावधि तक अतिक्रमण न हटाने पर प्रशासन द्वारा की जाने वाली बुलडोजर कार्रवाई में आने वाला समस्त विधिक व प्रशासनिक व्यय (खर्चा) इन्हीं संबंधित दुकानदारों से भू-राजस्व की भांति वसूला जाएगा।

पीपीपी मोड पर ₹80 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक टर्मिनल

रुद्रपुर वर्तमान में कुमाऊं की आर्थिक व औद्योगिक राजधानी के रूप में विधिक पहचान बना चुका है, जहां लाखों श्रमिक और व्यावसायिक वर्ग आवागमन करते हैं। पुराने बस अड्डे की साढ़े तीन एकड़ बेशकीमती भूमि पर बनने वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट की मुख्य विधिक व तकनीकी विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • लागत और संचालन: यह हाईटेक बस टर्मिनल पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP Mode) के तहत कुल ₹८० करोड़ की भारी-भरकम लागत से निर्मित किया जा रहा है। इसके निर्माण का विधिक अनुबंध ‘सीआरएस इंफ्रा प्रोजेक्ट’ के साथ किया गया है, जो निर्माण के बाद अगले २५ वर्षों तक इसका विधिक संचालन करेगी।

  • हाईटेक विधिक सुविधाएं: इस मल्टीस्टोरी टर्मिनल परिसर में आधुनिक सिनेमाघर (मल्टीप्लेक्स), शॉपिंग मॉल, यात्रियों के ठहरने के लिए वातानुकूलित (AC) विश्रामालय, रेस्टोरेंट/कैंटीन और एक पेट्रोल पंप आदि की विश्वस्तरीय विधिक व व्यावहारिक व्यवस्था रहेगी।

  • 400 बसों का संचालन: इस टर्मिनल के पूर्ण रूप से क्रियाशील होने के बाद उत्तराखंड सहित दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब जैसे विभिन्न राज्यों के लिए रोजाना करीब ४०० बसों का सुचारू व विधिक आवागमन सुनिश्चित हो सकेगा।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद प्रोजेक्ट में आई तेजी

विदित हो कि पुराने बस अड्डे के सामने रामपुर रोड साइड के जर्जर विधिक भवनों को पूर्व में ही जमींदोज किया जा चुका है, लेकिन किच्छा बाईपास रोड की तरफ की दुकानें बड़ी बाधा बनी हुई थीं। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सचिवालय स्तर से इस महत्वाकांक्षी लोकहित परियोजना की स्वयं समीक्षा किए जाने के बाद पिछले दो महीनों के भीतर पूरी विधिक प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। एडीएम पंकज उपाध्याय ने इस संबंध में नगर आयुक्त से भी विधिक वार्ता कर सुरक्षा और कानून व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है, ताकि २७ जून की विधिक ध्वस्तिकरण कार्रवाई को शांतिपूर्वक संपन्न कराया जा सके।

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