उत्तराखंड में जून की सूखी मार: 12 जिलों में सामान्य से 35% कम बरसे बादल, संकट में धान-गन्ने की फसल; 29-30 जून तक मानसून आने की उम्मीद
देहरादून, 24 जून 2026: उत्तराखंड में इस वर्ष जून के महीने में उम्मीद से बेहद कम हुई बारिश ने किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। कमजोर पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते प्रदेश के १३ में से १२ जिलों में इस बार सामान्य से काफी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे पूरे राज्य में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ३५% पिछड़ गया है। मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी और उमस के कारण खरीफ की फसलों पर संकट मंडराने लगा है। हालांकि, मौसम विभाग ने राहत की खबर देते हुए अनुमान जताया है कि आगामी २९ और ३० जून तक उत्तराखंड में मानसून दस्तक दे सकता है।
हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में सूखे जैसे हालात; गन्ने और धान पर गहराया संकट
इस सीजन में सबसे कम बारिश मैदानी जिलों में दर्ज की गई है, जिससे खेती-किसानी को भारी नुकसान पहुंच रहा है:
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हरिद्वार: यहाँ सामान्य से सबसे ज्यादा ७४% कम बारिश हुई है, जिसके चलते धान और गन्ने की फसलों पर सीधा संकट छा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार उत्पादन में २०% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।
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ऊधमसिंह नगर: रुद्रपुर, काशीपुर और सितारगंज बेल्ट में ७२% कम बारिश होने से किसान अब महंगे डीजल और ट्यूबवेल के भरोसे धान की रोपाई करने को मजबूर हैं। जनवरी-फरवरी की सूखी मार के बाद अब आम और लीची की पैदावार भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
पहाड़ में मिले-जुले हालात: कहीं फसलों का आकार छोटा, कहीं सामान्य खेती
पर्वतीय अंचलों में कम बारिश और मौसम की अनिश्चितता का मिश्रित असर देखने को मिल रहा है:
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जौनसार-बावर व त्यूणी: देहरादून के इस ऊंचाई वाले क्षेत्र में वर्षा न होने से मक्का की बुवाई समय पर नहीं हो सकी। नकदी फसल हरा धनिया प्रभावित है, जबकि टमाटर और हाई-डेंसिटी सेब का आकार सामान्य से काफी छोटा रह गया है।
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नैनीताल व अल्मोड़ा: नैनीताल के रामगढ़ और धारी क्षेत्र में सेब, पुलम, खुमानी और नाशपाती के उत्पादन में ५०% तक की गिरावट की आशंका है। अल्मोड़ा में पूर्व में हुई भारी ओलावृष्टि के कारण फल उत्पादन पिछले तीन वर्षों में २०९२ मीट्रिक टन घट चुका है।
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यहाँ मिली राहत: केवल टिहरी एकमात्र ऐसा जिला रहा जहां सामान्य से अधिक बारिश हुई। इसके अलावा बागेश्वर, चमोली और चम्पावत में समय पर हुई वर्षा से धान, मड़ुवा और अन्य फसलों की बुवाई पूरी तरह सामान्य चल रही है।
मई में खूब बरसे थे बादल, जून में सूख गए खेत (बारिश का गणित):
| महीना | सामान्य वर्षा | इस वर्ष हुई वर्षा | स्थिति |
| मई 2026 | ६२.६ मिमी | ८४.१ मिमी | ३४% अधिक (राहत) |
| जून 2026 (अब तक) | ११५.६ मिमी | ७४.९ मिमी | 35% कम (चिंताजनक) |
आज देहरादून और टिहरी समेत 8 जिलों में झमाझम की चेतावनी
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. सी.एस. तोमर के अनुसार, आगामी २८ जून तक राज्य में प्री-मानसून गतिविधियां तेज होंगी। मौसम विभाग ने आज उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल, देहरादून, टिहरी और पिथौरागढ़ जनपदों के कुछ स्थानों पर गर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश का बुलेटिन जारी किया है। शेष जिलों में बहुत हल्की बौछारें पड़ सकती हैं।
कृषि विशेषज्ञों की राय: मानसून का इंतजार करें किसान
कृषि विशेषज्ञ राजा राम और विभागीय अधिकारियों का मानना है कि धान और गन्ने की फसल इस समय पूरी तरह पानी पर निर्भर है। यदि जून के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं होती है, तो खरीफ सीजन की उत्पादकता व्यापक रूप से प्रभावित होगी। कृषि विभाग ने किसानों को विधिक व तकनीकी सलाह दी है कि वे पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही धान की मुख्य रोपाई का कार्य करें, ताकि लागत और फसल दोनों को सुरक्षित रखा जा सके।
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