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फूलदेई की धूम: बच्चों ने देहरियों पर बिखेरे फूल; ‘घोघा माता’ की डोली के साथ निकली भव्य शोभायात्रा

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श्रीनगर (15 मार्च 2026): चैत्र मास के प्रथम दिन मनाए जाने वाले ‘बालपर्व’ फूलदेई का उत्साह श्रीनगर में चरम पर दिखा। नन्हे ‘फुलारियों’ ने घर-घर जाकर सुख-समृद्धि की कामना की और अपनी प्राचीन संस्कृति को जीवंत किया।

1. नागेश्वर महादेव मंदिर से भव्य आगाज़

उत्सव की शुरुआत सुबह नागेश्वर महादेव मंदिर परिसर से हुई:

  • पूजा-अर्चना: नगर के विभिन्न स्कूलों के बच्चे पारंपरिक पहाड़ी परिधानों में सज-धजकर मंदिर पहुँचे। भगवान का आशीर्वाद लेने के बाद यहाँ से एक भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ।

  • पारंपरिक गीत: नगर की गलियाँ “फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भर भकार” जैसे लोक गीतों से गुंजायमान हो उठीं।

2. शोभायात्रा के मुख्य आकर्षण

श्रीनगर के मुख्य मार्गों से गुजरी इस शोभायात्रा ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा:

  • घोघा माता की डोली: लोक मान्यताओं के अनुसार फूलदेई पर्व में पूजी जाने वाली घोघा माता की डोली शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रही। पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमोह) की थाप पर डोली के साथ श्रद्धालु झूमते नजर आए।

  • देहरी पूजन: हाथों में फूलों की टोकरियाँ लिए छोटे-छोटे बच्चों ने रास्ते में पड़ने वाले घरों की देहरियों पर फूल डालकर लोक कल्याण की कामना की।

3. स्थानीय लोगों का उत्साह

स्थानीय निवासियों ने भी अपनी परंपरा का मान रखते हुए बच्चों का जोरदार स्वागत किया:

  • आशीर्वाद और उपहार: घरों की देहरियों पर फूल डालने आए बच्चों को बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिया और उपहार स्वरूप चावल, गुड़ और दक्षिणा भेंट की।

  • सांस्कृतिक महत्व: कार्यक्रम में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से जुड़ी रहती है।


Snapshot: फूलदेई उत्सव – श्रीनगर

मुख्य बिंदु विवरण
प्रारंभ स्थल नागेश्वर महादेव मंदिर परिसर
मुख्य पात्र नन्हे बच्चे (फुलारी)
पारंपरिक गीत फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार…
विशेष आकर्षण घोघा माता की डोली और पारंपरिक वाद्य यंत्र
संदेश लोक संस्कृति का संरक्षण और प्रकृति का आभार

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