उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को अपनी माँ के साथ पिथौरागढ़ जिले के कनालीछीना क्षेत्र में स्थित अपने पैतृक गाँव टुंडी-बारमौं पहुँचे और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने गाँव के मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना भी की।
❤️ गाँव के अनुभव और भावनाएँ
मुख्यमंत्री धामी ने सोशल मीडिया पर इस अनुभव को साझा करते हुए इसे बेहद भावुक क्षण बताया:
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जड़ों का महत्व: उन्होंने कहा, “यह वही धरा है जहाँ मैंने बचपन बिताया, पहली बार विद्यालय की राह पकड़ी और जहाँ गाँव के स्नेह, संस्कृति और परम्पराओं की समृद्ध छाया ने मेरे व्यक्तित्व को आकार दिया।”
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अपनत्व और प्रेम: उन्होंने बताया कि गाँव पहुँचते ही बुजुर्गों का स्नेहिल आशीर्वाद और मातृशक्ति का अथाह प्रेम मन को भावनाओं से भर गया। “कई बुजुर्ग आज भी मुझे बचपन के नाम से पुकारते हैं, यह अपनत्व शब्दों में समाना मुश्किल है।”
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स्मृतियाँ: नौनिहालों और युवाओं की मुस्कुराहटों में वह सारी स्मृतियाँ फिर जीवंत हो उठीं, जिन्होंने उन्हें मूल्य सिखाए और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
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पहचान: उन्होंने कहा कि टुंडी-बारमौं उनके लिए सिर्फ एक गाँव नहीं बल्कि उनकी जड़, संस्कार और पहचान भी है।
🤝 मार्गदर्शन और जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीणों का स्नेह, प्रेम और विश्वास उनके लिए शक्ति, प्रेरणा और जिम्मेदारी है, जो हर कदम पर उनका मार्गदर्शन करता रहेगा।
🏘️ पैतृक गाँव वापसी का आह्वान
धामी ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह को दोहराते हुए कहा कि:
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प्रत्येक उत्तराखंडवासी को अपने पैतृक गाँव में अपने घरों को फिर से संवारना होगा।
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प्रवासी उत्त्तराखंडी अपने गाँव के विकास में अहम योगदान दे सकते हैं।
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