
अलका पाल ने कहा कि न्याय व्यवस्था भी मृत्यु से पूर्व दिए गए बयान को साक्ष्य मानती है, फिर ऐसे कौन से कारण हैं कि थाना अध्यक्षों और पुलिसकर्मियों को तो निलंबित किया जा रहा है, लेकिन एसएसपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि “बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है” वाली कहावत आज सच साबित हो रही है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि एसएसपी पर लगे आरोप निराधार हैं तो उन्हें स्वयं नैतिक आधार पर जांच पूरी होने तक पद से अलग हो जाना चाहिए था। इससे सच सामने आ जाता और “दूध का दूध, पानी का पानी” हो जाता।
अलका पाल ने दो टूक कहा कि कांग्रेस पीड़ित किसान परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। किसान सुखवंत सिंह द्वारा मृत्यु से पूर्व दिए गए बयान इस बात के स्पष्ट साक्ष्य हैं कि दोषी कौन हैं। इसके बावजूद कार्रवाई में ढिलाई बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड में जंगलराज जैसी स्थिति बनती जा रही है। भू-माफिया और खनन माफिया पूरे प्रदेश को त्रस्त कर रहे हैं, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
अलका पाल ने कहा, “आज प्रदेश की स्थिति अंधेर नगरी, चौपट राजा जैसी हो गई है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी।”
कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि किसान को न्याय नहीं मिला तो पार्टी सड़क से सदन तक आंदोलन तेज करेगी।
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